हिंदी कविता
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Read More... गुरु-पदावली: गुरु महिमा पर चुन्नू साहा की भावपूर्ण कविता
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By Mohit Sinha
'गुरु-पदावली' कवि चुन्नू साहा की एक प्रेरणादायक कविता है, जिसमें गुरु की महिमा, उनके महत्व और जीवन में उनकी भूमिका का सुंदर वर्णन किया गया है। कविता बताती है कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन का सही मार्ग दिखाने वाला प्रकाश है। पुरुषोत्तम मास में क्यों बढ़ जाता है दान-पुण्य का महत्व? पढ़ें यह सुंदर काव्य रचना
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By Mohit Sinha
कवयित्री सुनीता अग्रवाल ‘पिंकी’ की यह कविता अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास के धार्मिक महत्व, दान-पुण्य, संयम और आध्यात्मिक साधना की महत्ता को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। आपसी मनमुटाव ठीक नहीं
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By Mohit Sinha
‘आपसी मनमुटाव ठीक नहीं’ कविता रिश्तों में बढ़ती दूरियों, खामोशी और संवादहीनता की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि चुन्नू साहा ने जीवन की नश्वरता और अपनों के महत्व को रेखांकित करते हुए संदेश दिया है कि मनमुटाव को लंबे समय तक नहीं पालना चाहिए। सात समंदर पार बंधी काव्य की डोर: साहिबगंज से सऊदी तक गूंजा 'वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स' का तराना
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By Mohit Sinha
लखनऊ के साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. मनोज अग्रवाल ‘गुमनाम लखनवी’ के मंच ‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में 10 देशों के कवियों और श्रोताओं ने हिस्सा लिया। कभी सोचे ना थे, महादेव: अन्याय और आस्था पर भावुक कविता
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By Mohit Sinha
“कभी सोचे ना थे, महादेव” एक भावनात्मक कविता है, जिसमें अन्याय, पीड़ा और आस्था का गहरा चित्रण किया गया है। कवि ने महादेव से संवाद के माध्यम से जीवन में आए कठिन समय, एकतरफा सजा और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
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By Mohit Sinha
“आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं। 'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल
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By Mohit Sinha
कवि राजेश पाठक की कविता “जादूगर” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कविता में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून की कमजोर स्थिति, किसानों और आम जनता की परेशानियों तथा व्यवस्था की निष्क्रियता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया है। 