हिंदी कविता
साहित्य 

आपसी मनमुटाव ठीक नहीं

आपसी मनमुटाव ठीक नहीं ‘आपसी मनमुटाव ठीक नहीं’ कविता रिश्तों में बढ़ती दूरियों, खामोशी और संवादहीनता की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि चुन्नू साहा ने जीवन की नश्वरता और अपनों के महत्व को रेखांकित करते हुए संदेश दिया है कि मनमुटाव को लंबे समय तक नहीं पालना चाहिए।
Read More...
समाचार  राज्य  राष्ट्रीय  साहिबगंज  झारखण्ड 

सात समंदर पार बंधी काव्य की डोर: साहिबगंज से सऊदी तक गूंजा 'वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स' का तराना

सात समंदर पार बंधी काव्य की डोर: साहिबगंज से सऊदी तक गूंजा 'वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स' का तराना लखनऊ के साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. मनोज अग्रवाल ‘गुमनाम लखनवी’ के मंच ‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में 10 देशों के कवियों और श्रोताओं ने हिस्सा लिया।
Read More...
साहित्य 

कभी सोचे ना थे, महादेव: अन्याय और आस्था पर भावुक कविता

कभी सोचे ना थे, महादेव: अन्याय और आस्था पर भावुक कविता “कभी सोचे ना थे, महादेव” एक भावनात्मक कविता है, जिसमें अन्याय, पीड़ा और आस्था का गहरा चित्रण किया गया है। कवि ने महादेव से संवाद के माध्यम से जीवन में आए कठिन समय, एकतरफा सजा और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
Read More...
साहित्य 

आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता

आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता “आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं।
Read More...
साहित्य 

'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल

'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल कवि राजेश पाठक की कविता “जादूगर” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कविता में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून की कमजोर स्थिति, किसानों और आम जनता की परेशानियों तथा व्यवस्था की निष्क्रियता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया है।
Read More...

Advertisement