Literature
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Read More... पुरुषोत्तम मास में क्यों बढ़ जाता है दान-पुण्य का महत्व? पढ़ें यह सुंदर काव्य रचना
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By Mohit Sinha
कवयित्री सुनीता अग्रवाल ‘पिंकी’ की यह कविता अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास के धार्मिक महत्व, दान-पुण्य, संयम और आध्यात्मिक साधना की महत्ता को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। आपसी मनमुटाव ठीक नहीं
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By Mohit Sinha
‘आपसी मनमुटाव ठीक नहीं’ कविता रिश्तों में बढ़ती दूरियों, खामोशी और संवादहीनता की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि चुन्नू साहा ने जीवन की नश्वरता और अपनों के महत्व को रेखांकित करते हुए संदेश दिया है कि मनमुटाव को लंबे समय तक नहीं पालना चाहिए। लोकार्पण: जब साहित्य औपचारिकता के 'समोसे' में खो गया....
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By Mohit Sinha
यह व्यंग्यात्मक आलेख आज के साहित्यिक लोकार्पण समारोहों की बदलती तस्वीर को सामने लाता है। लेखक ने दिखाया है कि कैसे किताबों का विमोचन अब साहित्यिक विमर्श से अधिक दिखावे, औपचारिकता, सोशल मीडिया प्रचार और चाय-समोसे के आयोजनों तक सीमित होता जा रहा है। बशीर बद्र: वो शायर जो हमारे टूटे दिल की बोली बोल गया
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By Mohit Sinha
उर्दू शायरी के मशहूर शायर बशीर बद्र ने अपनी सरल, संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनकी शायरी मोहब्बत, रिश्तों, यादों और इंसानियत की गहरी समझ को बयां करती है। सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, सुरक्षा भी चाहिए: झारखंड के साहित्यकारों और कलाकारों के लिए कल्याण कोष की मांग
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By Mohit Sinha
झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने वाले साहित्यकारों और लोक कलाकारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खोरठा साहित्यकार स्व. सुरेश कुमार विश्वकर्मा ‘सुकुमार’ और पद्मश्री डॉ. गिरिधारी राम गौंझू जैसे सांस्कृतिक व्यक्तित्वों के संघर्ष ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या समाज और व्यवस्था केवल सम्मान तक सीमित है। लिंडसे क्लब, धनबाद के लघु पत्रिका मेले में शामिल हुए कई साहित्यकार, कहा – पढने-लिखने से होगा मानव का विकास
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By Samridh Jharkhand
धनबाद : लिंडसे क्लब एंड लाइब्रेरी, हीरापुर, धनबाद के द्वारा तीन दिवसीय शिल्पे अनन्या लघु पत्रिका मेले का आयोजन 23 दिसंबर से किया गया है। यह आयोजन 25 दिसंबर तक चलेगा। कार्यक्रम में देश के जाने-माने लेखक, साहित्यकार, कवि और... 