विकेन्द्रित उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलती है मजबूती: कल्पना सोरेन
महिला समूह आधारित उत्पादन प्रणाली को बताया रोजगार का मजबूत माध्यम
गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने महिलाओं की सामूहिक शक्ति और आत्मनिर्भरता को रेखांकित करते हुए ‘श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़’ मॉडल को महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
रांची: झारखंड के गांडेय विधानसभा क्षेत्र की विधायक कल्पना सोरेन ने महिलाओं की सामूहिक शक्ति, आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना को रेखांकित करते हुए बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विचारोत्तेजक संदेश साझा किया। अपने पोस्ट में उन्होंने “संघे शक्ति कलियुगे” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध सहकारी संस्था ‘श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़’ को महिला सशक्तिकरण का जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि लिज्जत पापड़ केवल एक व्यावसायिक संस्था नहीं, बल्कि महिलाओं के सामूहिक प्रयास, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन का सफल आंदोलन है, जिसने लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है।

अपने संदेश में विधायक ने कहा कि ‘लिज्जत पापड़’ केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त आंदोलन है, जिसने लाखों महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका, आत्मनिर्भरता और सामाजिक पहचान दिलाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहकारी मॉडल समाज में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन लाने की बड़ी क्षमता रखते हैं। सामूहिक भागीदारी और साझी जिम्मेदारी पर आधारित यह मॉडल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी पैदा करता है।
कल्पना सोरेन ने विशेष रूप से “डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोडक्शन” यानी विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मॉडल महिलाओं को अपने घर या स्थानीय स्तर पर रहकर काम करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बन पाती हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इस प्रकार की व्यवस्था महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें रोजगार के लिए घर छोड़कर दूर शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक कौशल और घरेलू उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
विधायक ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गृह एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि लिज्जत पापड़ जैसे सफल सहकारी मॉडल को हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, वन उत्पाद, बांस उद्योग और अन्य लघु उद्योग क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार यदि महिलाओं को प्रशिक्षण, बाज़ार और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कल्पना सोरेन ने सरकार, स्वयंसेवी संस्थाओं और निजी क्षेत्र से इस दिशा में समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि सहकारी मॉडल और महिला समूह आधारित उत्पादन प्रणाली को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा दिया जाए, तो ग्रामीण परिवारों को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराई जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति भी हैं। झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो द्वारा संसदीय समितियों के पुनर्गठन के दौरान उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
समिति के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण समाज से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि झारखंड में भी उन्हें लागू करने की दिशा में पहल की जा सके।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
