अपराध की राजधानी बना झारखंड: प्रति लाख हत्या दर में देश में नंबर-1 होने पर भाजपा का हेमंत सरकार पर प्रहार
हेमंत सरकार की विफलता के प्रमाण हैं राज्य में हुई 9250 से अधिक हत्याएं
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने NCRB के आंकड़ों के हवाले से झारखंड को हत्या के मामलों में देश में अव्वल बताते हुए हेमंत सरकार पर प्रशासनिक पंगुता और ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ अपराध चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ ट्रेनिंग पूरी कर चुके 39 डीएसपी को ढाई साल से नियुक्त न कर जनता के 14 करोड़ रुपये बर्बाद किए जा रहे हैं।
रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड को अपराध की राजधानी बनाने वाली हेमंत सरकार अब प्रशासनिक पंगुता और ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग का प्रतीक बन चुकी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वर्ष 2024 के विस्तृत विश्लेषण किए आंकड़े बेहद भयावह तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। एनसीआरबी के अनुसार प्रति लाख आबादी पर हत्या के मामलों में झारखंड पूरे देश में नंबर वन बन गया है।
वर्ष 2024 में राज्य में 1472 हत्याएं हुईं और हत्या का अनुपात 3.7 प्रति एक लाख आबादी दर्ज किया गया, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 1.9 है।प्रतुल ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो के नेता अक्सर उत्तर प्रदेश का उदाहरण देकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे यह नहीं बताते कि उत्तर प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर हत्या का अनुपात केवल 1.3 है।यानी जनसंख्या के अनुपात में झारखंड कहीं अधिक असुरक्षित और अपराधग्रस्त राज्य बन चुका है।


प्रतुल ने कहा कि स्थिति इतनी विचित्र है कि दूसरी ओर सरकार ने ट्रेनिंग पूरी कर चुके 39 डीएसपी को ढाई वर्षों से बैठाकर रखा हुआ है। इन डीएसपी की नियुक्ति जुलाई 2022 में हुई थी और इन्होंने अक्टूबर 2023 में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली। उसके बाद आज तक इनकी पोस्टिंग नहीं होना कई सवालों को जन्म देता है। सरकार अब तक इनके वेतन और भत्तों में लगभग 14 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
आखिर किस कारण से इन डीएसपी की पदों पर नियुक्ति नहीं हो रही? क्या राज्य में कानून व्यवस्था सुधारने की सरकार की कोई मंशा ही नहीं है?प्रतुल ने कहा ऐसा प्रतीत होता है कि झारखंड में ट्रांसफर-पोस्टिंग अब एक समानांतर उद्योग का रूप ले चुका है, जहां योग्यता और प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि दूसरे समीकरण काम कर रहे हैं। हेमंत सरकार को जनता को स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि जब राज्य अपराध में जल रहा है, तब प्रशिक्षित अधिकारियों को आखिर क्यों बैठाकर रखा गया है?
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