अजय कुमार, लखनऊ
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Read... Opinion : संसद के मकर द्वार पर गुस्से का विस्फोट और राजनीति की मर्यादा पर उठते सवाल
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By अजय कुमार, लखनऊ
4 फरवरी को संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने भारतीय राजनीति की भाषा और मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह विवाद अब व्यक्तिगत आरोपों से आगे बढ़कर राष्ट्रीय बहस बन चुका है। Opinion : मणिपुर में नई सरकार की वापसी और खेमचंद सिंह की सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा
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By अजय कुमार, लखनऊ
करीब एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर में युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई चुनी हुई सरकार बनने जा रही है। जातीय हिंसा, विस्थापन और अविश्वास से जूझ रहे राज्य के सामने अब शांति बहाली और पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती है। Opinion : डिजिटल लत के साये में बचपन, टूटती जिंदगियां और भारत की अधूरी सोशल मीडिया सुरक्षा नीति
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By अजय कुमार, लखनऊ
भारत में तेजी से बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट पहुंच बच्चों की मानसिक दुनिया को बदल रही है। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया एल्गोरिदम उन्हें लत के जाल में फंसा रहे हैं, जहां खेल और असली जिंदगी की सीमा मिटती जा रही है। हाल की घटनाएं इस डिजिटल खतरे की गंभीरता को उजागर करती हैं। ममता बनर्जी का एसआईआर विरोध: घुसपैठियों को बचाने का आरोप तेज
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By अजय कुमार, लखनऊ
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के विरोध को लेकर ममता बनर्जी पर घुसपैठियों और फर्जी वोटरों का साथ देने का आरोप लग रहा है, जबकि बीएलओज को भारी राजनीतिक दबाव व धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। बिहार: नामांकन के अंतिम दिन तक महागठबंधन में सीटों के लिये घमासान
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By अजय कुमार, लखनऊ
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए विपक्षी इंडी गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। राजद और कांग्रेस के बीच 50-80 सीटों को लेकर खींचतान है, वहीं वीआईपी 15 सीटों की मांग कर रहा है। राहुल गांधी और लालू यादव की बैठक ने गठबंधन को बचाने की कोशिश की, लेकिन जातीय, क्षेत्रीय और स्थानीय समीकरणों के कारण समन्वय अधूरा है। नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक है, और विपक्ष की एकजुटता पर प्रश्न खड़ा हो गया है। Opinion: योगी की तारीफ से क्यों बढ़ी अखिलेश की बेचैनी
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By अजय कुमार, लखनऊ
बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ रैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए सपा और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला, जिससे यूपी की सियासत में नई हलचल मच गई है। उन्होंने घोषणा की कि बीएसपी 2027 का चुनाव अकेले लड़ेगी और गठबंधन से दूर रहेगी। मायावती की रणनीति सपा के ‘पीडीए फार्मूले’ को कमजोर कर दलित, बहुजन और गैर-जाटव वोटरों को फिर से अपने पक्ष में एकजुट करने की है। भाजपा के प्रति नरम रुख अपनाकर वे दलित वोट बैंक में सेंध रोकना चाहती हैं। यह कदम उनके 2007 जैसे व्यापक सामाजिक समीकरण को दोबारा जीवित करने की कोशिश है। Opinion: संघ की विचारधारा पर क्यों उठती है बार-बार उंगली
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By अजय कुमार, लखनऊ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 साल का जश्न मना रहा है। संघ ने आलोचनाओं और प्रतिबंधों के बावजूद समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी। महिलाओं और दलितों को सम्मान न मिलने के आरोपों के बीच भी संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और संस्कार निर्माण में कई योजनाएँ चलाई हैं, जिससे महिलाओं का सशक्तिकरण और राष्ट्र सेवा सुनिश्चित होती है। Opinion: आई लव मोहम्मद की हकीकत और साज़िशों का सच
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By अजय कुमार, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में “आई लव मोहम्मद” पोस्टरों और बैनरों के कारण धार्मिक और राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। असली संदेश पैग़म्बर मोहम्मद का जीवन अपनाने में है, न कि पोस्टर-नारेबाज़ी में। विशेषज्ञ और विद्वानों का कहना है कि इसे समाज में दंगे भड़काने और राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। Opinion: छात्र संघ चुनाव नतीजों का संदेश, जेन जेड मोदी के साथ
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By अजय कुमार, लखनऊ
दिल्ली और अन्य राज्यों में हुए छात्र संघ चुनावों में एबीवीपी की जीत ने साफ संकेत दिया है कि नई पीढ़ी मोदी और बीजेपी के विचारों के साथ जुड़ रही है। कांग्रेस और वामपंथी छात्र संगठन कमजोर होते दिख रहे हैं। Opinion: आजम नहीं छोड़ेगें समाजवादी पार्टीः शिवपाल
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By अजय कुमार, लखनऊ
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रिहाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने स्पष्ट किया कि आजम खान पार्टी छोड़ेंगे नहीं। रामपुर और पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट बैंक पर उनकी पकड़ मजबूत है, और उनकी रिहाई आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव की खामोशी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। Opinion: जेल से बाहर आये आजम की चुप्पी ने बढ़ाया सियासी पारा
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By अजय कुमार, लखनऊ
कद्दावर नेता आजम खान 23 माह के बाद जेल से रिहा हो गए हैं। रिहाई के बाद उन्होंने कोई बयान नहीं दिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं। समाजवादी पार्टी ने फिलहाल उनसे दूरी बनाई है, जबकि आजम के पास बहुजन समाज पार्टी या ओवैसी के साथ नए राजनीतिक विकल्प तलाशने के रास्ते खुले हैं। उनकी कट्टर मुस्लिम छवि सपा के लिए चुनौती बनी हुई है। 
बिहार में राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है। 6 नवंबर को राज्य की सियासत की दिशा तय करने वाला पहला चरण होने जा रहा है, जिसमें 18 जिलों की 121...