CAG रिपोर्ट में खुलासा: साहिबगंज में अधूरे दस्तावेजों पर 11 पत्थर खनन पट्टे आवंटित
ऑडिट में अधूरे शपथपत्र और रॉयल्टी क्लीयरेंस के बिना पट्टे मंजूर होने का खुलासा
साहिबगंज जिला खनन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर CAG की 2025 ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अधूरे शपथपत्र और रॉयल्टी क्लीयरेंस के बिना 11 पत्थर खनन पट्टों को मंजूरी दे दी गई।
संजय कुमार धीरज
साहिबगंज: जहां आम नागरिक को जाति प्रमाण पत्र की एक गलती सुधारने में महीनों दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं साहिबगंज में करोड़ों के 11 पत्थर खनन पट्टे अधूरे शपथपत्र और बिना रॉयल्टी क्लीयरेंस के ही बांट दिए गए। कैग की 2025 की ऑडिट रिपोर्ट ने जिला खनन कार्यालय की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
एक ही पैटर्न: कागज अधूरे, मंजूरी पूरी

जांच नहीं हुई, खदानें आज भी चालू

रॉयल्टी बकाया पकड़ने का कोई सिस्टम ही नहीं
नियम 9(5) के तहत आवेदक को पुराने खनन पट्टों का रॉयल्टी क्लीयरेंस देना अनिवार्य है। मगर कैग ने पाया कि राज्य सरकार के पास ऐसा कोई केंद्रीकृत तंत्र ही नहीं है जिससे पता चल सके कि आवेदक पर किसी दूसरे जिले में रॉयल्टी बकाया है या नहीं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कई आवेदक नई लीज लेने में कामयाब हो गए।
संरक्षण या लापरवाही: जवाबदेही तय हो
साहिबगंज में लंबे समय से चर्चा है कि खनन के कुछ प्रभावशाली लोगों को प्रशासनिक संरक्षण मिलता है। कैग रिपोर्ट सीधे किसी का नाम नहीं लेती, लेकिन 11 मामलों में एक जैसा पैटर्न बताता है कि नियमों की अनदेखी कोई अपवाद नहीं, बल्कि सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है। अब सवाल सिर्फ दस्तावेजों की कमी का नहीं है। सवाल यह है कि अधूरी फाइलें आगे किसने बढ़ाईं? क्या अधिकारियों ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की, या किसी दबाव में आंखें मूंद ली गईं? कैग ने जवाबदेही तय करने की सिफारिश की है। अब देखना है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या यह रिपोर्ट भी आम आदमी की अर्जियों की तरह दफ्तरों में धूल फांकती रह जाएगी।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


