EXCLUSIVE: ड्राइवर सुसाइड केस से जुड़ा नाम, फिर भी मिली VC की कुर्सी! रांची यूनिवर्सिटी नियुक्ति पर उठे सवाल
NIOS कार्यकाल के दौरान ड्राइवर की आत्महत्या से जुड़ा है मामला
कुलपति पर मानसिक प्रताड़ना, जातीय भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप, VC ने कहा- आरोप असत्य और भ्रामक
रांची: रांची यूनिवर्सिटी में नए कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की नियुक्ति की गई है. पर प्रो सरोज शर्मा की नियुक्ति के साथ ही उनपर लगा एक गंभीर आरोप सुर्ख़ियों में आ गया है. यह मामला उस वक्त का है जब वह National Institute of Open Schooling (NIOS) की अध्यक्ष थीं. रांची यूनिवर्सिटी में प्रो. शर्मा की नियुक्ति के साथ ही एक बार फिर यह मामला तूल पकड़ने लगा है. वहीँ, शिक्षा जगत में नियुक्तियों में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि यह विवाद उनके स्टाफ ड्राइवर राम कुमार की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसने अपने सुसाइड नोट में प्रो. शर्मा पर मानसिक प्रताड़ना, जातिसूचक अपमान और उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद दर्ज एफआईआर और पुलिस जांच ने देशभर में शिक्षण संस्थानों की कार्यसंस्कृति पर सवालिया निशान लगा दिया था.
क्या है पूरा मामला ?
रांची में नियुक्ति के साथ ही उठे सवाल

पूर्व में क्यों रद्द हुई थीं नियुक्ति
NIOS में कार्यरत ड्राइवर राम कुमार ने आत्महत्या का सुसाइड नोट ही विवाद का सबसे अहम आधार बना. इसमें लगाए गए आरोप कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। नोट में मानसिक प्रताड़ना, लगातार मानसिक दबाव और अपमान का उल्लेख है जिसे राम कुमार ने असहनीय बताया था।
इसके साथ ही राम कुमार ने जातीय भेदभाव, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग और सामाजिक रूप से अपमानित करने के गंभीर आरोप लगाये थे रामकुमार ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न को लेकर लिखा था कि प्रो शर्मा ने कार्यस्थल के माहौल को प्रतिकूल और अपमानजनक बना दिया था।
कानूनी कार्रवाई और जांच जारी
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत ड्राईवर राम कुमार की आत्महत्या के मामले को दर्ज किया. आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है. फिलहाल जांच जारी है और सुसाइड नोट सहित सभी साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।
केंद्र सरकार का हस्तक्षेप
इस पूरे मामले को लेकर बढ़ते दबाव के बीच अक्टूबर 2024 में केंद्र सरकार ने अहम निर्णय लिया. प्रो. सरोज शर्मा को NIOS चेयरपर्सन पद से हटाया गया. उन्हें उनके मूल संस्थान गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय वापस भेजा गया.
गुजरात में भी पड़ा असर भारतीय शिक्षक शिक्षा संस्थान में कुलपति पद पर उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई। यह निर्णय पदभार ग्रहण करने से पहले ही लिया गया।
अब रांची में नियुक्ति पर मचा घमासान
इस पूरे प्रकरण को लेकर छात्र संगठनों ने प्रो सरोज शर्मा की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं. वहीँ, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पारदर्शिता की मांग की है.
कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने आरोपों को बताया निराधार
इस मामले में कुलपति प्रो. सरोज शर्मा से बात की गई तो उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा यह विषय सक्षम प्रशासनिक प्राधिकरण द्वारा विधिवत जांच कर निष्पादित किया जा चुका है, तथा इसकी जानकारी अपेक्षित रूप से प्रस्तुत भी की गई है। इस संबंध में कुछ असत्यापित सूचनाएँ मीडिया में प्रसारित हुई थीं, जिनका संशोधन बाद में न्यूज़ एजेंसी पीटीआई एवं अन्य समाचार पत्रों द्वारा भी किया गया है। ये वक्तव्य सत्यता से परे हैं एवं आवश्यक होने पर संबंधित जानकारी/दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।”
हालांकि, बाद में दोबारा संपर्क करने पर प्रो. शर्मा ने सवांददाता से यह भी कहा कि आप मुझे ब्लैकमेल कर रहे हैं। इस पर संवाददाता द्वारा स्पष्ट किया गया कि खबर प्रकाशित करने से पहले प्रतिक्रिया लेना पत्रकारिता प्रक्रिया का हिस्सा है और उनसे किसी प्रकार की व्यक्तिगत मांग नहीं की गई है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल?
क्या जांच पूरी होने से पहले इतनी महत्वपूर्ण नियुक्ति उचित है?
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