आउटसोर्सिंग कंपनी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज को ब्लैकलिस्ट से हटाया

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनाया महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला'

आउटसोर्सिंग कंपनी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज को ब्लैकलिस्ट से हटाया
(हाईकोर्ट से कंपनी को राहत)

झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कारण बताओ नोटिस में बिना उल्लेख किए ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने आउटसोर्सिंग कंपनी राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के ब्लैकलिस्टिंग आदेश को रद्द कर दिया है। 30 जून 2026 (मंगलवार) को मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनाए अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी भी संस्था या कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने से पहले उसे स्पष्ट रूप से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) देना और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर प्रदान करना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई ब्लैकलिस्टिंग प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

मामला W.P. (C) No. 1867 of 2023 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत कंपनी का अनुबंध समाप्त करने के साथ-साथ उसे ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया था। कंपनी का कहना था कि विभाग ने जारी कारण बताओ नोटिस में केवल अनुबंध समाप्त करने का उल्लेख किया था, जबकि ब्लैकलिस्ट करने का कोई प्रस्ताव नहीं बताया गया था।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि 31 जनवरी 2023 को जारी कारण बताओ नोटिस में कहीं भी यह नहीं लिखा गया था कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इसके बावजूद बाद में विभाग ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी संस्था को ब्लैकलिस्ट करने से पहले यह स्पष्ट रूप से बताना आवश्यक है कि उसके विरुद्ध ऐसी कार्रवाई प्रस्तावित है, ताकि वह अपना प्रभावी पक्ष रख सके।

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि ब्लैकलिस्टिंग एक अत्यंत गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई है, क्योंकि इसके बाद संबंधित कंपनी भविष्य में सरकारी निविदाओं और अनुबंधों में भाग लेने से वंचित हो सकती है। इसलिए इस प्रकार की कार्रवाई करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और विधिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में गोरखा सिक्योरिटी सर्विसेज बनाम दिल्ली सरकार, कुलजा इंडस्ट्रीज लिमिटेड, वेटइंडिया फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड सहित सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कारण बताओ नोटिस में ब्लैकलिस्टिंग का प्रस्ताव ही नहीं हो, तो बाद में ब्लैकलिस्टिंग का आदेश कानूनी रूप से टिक नहीं सकता।

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हालांकि, अदालत ने कंपनी के अनुबंध समाप्त किए जाने के मुद्दे पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। कोर्ट ने कहा कि अनुबंध की अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए इस संबंध में कंपनी यदि चाहे तो सक्षम प्राधिकारी अथवा उचित न्यायिक मंच के समक्ष उपलब्ध कानूनी उपाय अपना सकती है।

अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने ब्लैकलिस्टिंग संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। इसके साथ ही अदालत ने अनुबंध समाप्ति से जुड़े सभी पक्षों के अधिकार सुरक्षित रखते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। इस फैसले के बाद राइडर सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट से राहत मिल गई है।

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Edited By: Anjali Sinha
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