Koderma News: पत्रकार को "चिह्नित" करने का अधिकार किसी प्रेस क्लब अथवा जिला प्रशासन को नहीं: शाहनवाज हसन
प्रेस परिषद अधिनियम के नियमों द्वारा नियंत्रित होती
कोडरमा में "पत्रकार कौन?" के प्रशासनिक सवाल पर वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट और संवैधानिक प्रावधानों के तहत स्पष्टीकरण दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी प्रेस क्लब या सामाजिक संगठन को किसी व्यक्ति के पत्रकार होने या न होने का प्रमाण पत्र देने या उन्हें "चिह्नित" करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। भारत में प्रेस की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 द्वारा नियंत्रित होती है, और यह अधिकार केवल अधिकृत यूनियन के दायरे में आता है, न कि जिला प्रशासनों के पास।
कोडरमा: अक्सर यह प्रश्न प्रशासनिक अधिकारियों एवं केंद्र/राज्य सरकार द्वारा पत्रकारों से पूछा जाता है...."पत्रकार कौन ? यह कौन तय करेगा" जेजेए की स्थापना के उपरांत यही प्रश्न तत्कालीन प्रधान सचिव संजय कुमार द्वारा वर्ष 1 मई 2014 को पूछा गया था। तब इसका हमने बहुत स्पष्ट जवाब दिया था। आप को इसका जवाब वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के अनुसार तय करना होगा । कोइ भी प्रेस क्लब, कोई भी पदाधिकारी यह तय नहीं कर सकता। पत्रकार कौन है यह केवल यूनियन ही तय कर सकता है।
किसी भी प्रेस क्लब (Press Club) या पत्रकार संघ को किसी व्यक्ति के पत्रकार होने या न होने का प्रमाण पत्र देने या उन्हें "चिह्नित" करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।भारत में प्रेस की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 द्वारा नियंत्रित होती है। प्रेस क्लब केवल पत्रकारों के लिए एक बैठक स्थल या सामाजिक संगठन होते हैं । जिनका उद्देश्य नेटवर्किंग और चर्चा करना होता है, न कि किसी को आधिकारिक रूप से मान्यता (Accreditation) देना। इसलिए पत्रकारों को चाहिए कि किसी जिला के उपायुक्त, राज्य सूचना निदेशक को यह तय करने के लिए ज्ञापन सौंपकर उपहास का पात्र नहीं बनें।
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