Bokaro News: सेल के नए सीएमडी डॉ. अशोक कुमार पांडा की नियुक्ति को मिली मंजूरी
32 वर्षों के शानदार सफर के बाद शीर्ष पद पर पहुंचे डॉ. पंडा
केंद्र सरकार ने डॉ. अशोक कुमार पंडा को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) का नया चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक (CMD) नियुक्त किया है। 1992 में एक प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में करियर शुरू करने वाले डॉ. पंडा के पास वित्त और रणनीतिक प्रबंधन का व्यापक अनुभव है, और वे 31 दिसंबर 2029 तक इस पद पर बने रहेंगे।
बोकारो: केंद्र सरकार ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के नए चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। भारत सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने डॉ. अशोक कुमार पांडा की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की है। कार्यवाहक सीएमडी के के सिंह को बनाया गया था,जिका कार्यकाल बहुत ही छोटा रहा।डॉ. अशोक कुमार पांडा वर्तमान में सेल में निदेशक (वित्त) के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें कंपनी का चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर 31 दिसंबर 2029 तक अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा।इस नियुक्ति को सेल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी के वित्तीय और संचालन संबंधी अनुभव को देखते हुए डॉ. पांडा से इस्पात उद्योग में नई रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।बता दें कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के सीएमडी अमरेंदु प्रकाश की जगह डॉक्टर अशोक कुमार पंडा ले रहे। अमरेंदु प्रकाश के इस्तीफे के बाद पद रिक्त था। 28 मार्च को चयन हुआ था।

उन्हें उनके गहन डोमेन ज्ञान, तकनीकी समझ और सक्रिय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है।बिजनेस फाइनेंस में पीएचडी डॉ. पंडा ने अपने करियर की शुरुआत सेल में प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में की थी, जब उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई पूरा किया था। सेल में कार्य करते हुए भी उन्होंने अपने ज्ञान को बढ़ाने की ललक बनाए रखी और देश के प्रमुख बिजनेस स्कूलों में से एक, XIM भुवनेश्वर से वित्त में विशेषज्ञता के साथ पूर्णकालिक पीजीडीएम किया।
इसके बाद उन्होंने बिजनेस फाइनेंस में पीएच.डी. की उपाधि भी प्राप्त की। सेल जैसे तकनीक-प्रधान संगठन में, डॉ. पंडा की पृष्ठभूमि, अनुभव, तत्परता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के चलते उन्होंने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उनके योगदान वाले प्रमुख क्षेत्रों में ऋण में 20,000 करोड़ की कमी लाने हेतु डीलिवरेजिंग प्रयासों के माध्यम से उधारी में कटौती। लागत कटौती की पहल, जिसमें संयंत्र-स्तर पर तकनीकी कारणों की पहचान और कार्य योजना बनाकर अक्षमताओं को दूर करना शामिल है।
भारतीय रेल को आपूर्ति किए गए रेलों की उचित कीमत निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका। सेल में स्थायी परिसंपत्तियों की बिक्री की लेखा नीति में संशोधन, जिससे लाभप्रदता में सुधार हुआ। नई कर व्यवस्था में परिवर्तन की पहल, जिससे स्थायी बचत सुनिश्चित हुई। सेल की इकाइयों में ई-इनवॉइसिंग की कार्यान्वयन प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका। सेल में केंद्रीकृत वेतन प्रणाली को स्थिर करने में योगदान। अपने पूरे करियर के दौरान, डॉ. पंडा ने उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमताएं दिखाई हैं। वे न केवल स्वयं प्रेरित व्यक्ति हैं, बल्कि टीम को साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व भी हैं।
कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी शांत चित्त से काम करने की क्षमता प्रदर्शित की है। उनकी विश्लेषणात्मक क्षमताएं उन्हें विभिन्न समस्याओं का अभिनव समाधान खोजने में मदद करती हैं। उन्होंने जहाँ-जहाँ काम किया है, वहाँ एक सकारात्मक सांस्कृतिक बदलाव लाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. पंडा ने सेल की कई संयुक्त उद्यम और सहायक कंपनियों के बोर्ड में नामित निदेशक के रूप में भी कार्य किया है।
