श्रावणी मेले के लिए खरीदी गईं बाइक एंबुलेंस बनीं शोपीस, देखरेख के अभाव में खा रहीं धूल; उठे बड़े सवाल
पिछले वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खरीदी गई थीं 10 बाइक एंबुलेंस
देवघर के जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में पिछले वर्ष श्रावणी मेले के लिए खरीदी गई 10 बाइक एंबुलेंस बदहाल स्थिति में पड़ी हैं। लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई ये एंबुलेंस रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होती जा रही हैं।
देवघर: श्रावणी मेले के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रशासनिक दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। पिछले वर्ष श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ वाले इलाकों से समय पर अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से खरीदी गई बाइक एंबुलेंस आज जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बदहाल स्थिति में पड़ी हैं।
देखरेख के अभाव में लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होती नजर आ रही है।

इससे स्पष्ट है कि इनके रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग चाहता तो इन बाइक एंबुलेंसों का उपयोग केवल श्रावणी मेले तक सीमित न रखकर सामान्य दिनों में भी किया जा सकता था।

हैरानी की बात यह है कि जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खड़ी इन एंबुलेंसों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। अब सवाल यह उठ रहा है कि हर वर्ष मेले से पहले इनकी मरम्मत पर सरकारी राशि खर्च कर मोटे बिल तो बनाए जाते हैं, लेकिन पूरे वर्ष इनके रखरखाव और उपयोग को लेकर कोई ठोस व्यवस्था क्यों नहीं की जाती।
इस संबंध में जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विश्वनाथ चौधरी ने बताया कि आम दिनों में इन बाइक एंबुलेंसों के उपयोग का कोई आदेश नहीं है। वहीं, जब उनसे एंबुलेंसों की खराब स्थिति की सूचना उच्च अधिकारियों को देने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।
उधर, स्थानीय विधायक सुरेश पासवान ने इसे सरकारी संपत्ति की बर्बादी बताते हुए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधनों का इस तरह अनुपयोगी पड़े रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर इन बाइक एंबुलेंसों को पुनः चालू कराने तथा आम जनता के हित में उनका उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
वही खराब पड़े इन बाइक एंबुलेंस को लेकर जब सिविल सर्जन डॉक्टर रमेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन तक नहीं पहुंची है। लेकिन अब वह इसको लेकर संबंधित पदाधिकारी से बात करेंगे और उच्च अधिकारियों तक इस समस्या को पहुंचाएंगे।
अब सवाल उठता है कि जिस अस्पताल केंद्र में यह एंबुलेंस खराब हो रहे हैं क्या वहां के कर्मचारी किस पर नजर नहीं पड़ रही है। यदि पढ़ रही है तो उन्होंने इसे सुचारु रूप से चलने के लिए क्या कदम उठाया?
एक तरफ उच्च अधिकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधा मुहैया करा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में मौजूद पदाधिकारी व कर्मचारी सिर्फ खाना पूर्ति करते दिख रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जनता की सुविधा के लिए खरीदी गई ये बाइक एंबुलेंस आखिर कब तक अस्पताल परिसर में धूल फांकती रहेंगी, और इनका वास्तविक उद्देश्य कब पूरा होगा?
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


