भारत पाकिस्तान तनाव
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Read More... Pahalgam Terror Attack: कैसे रची गई साजिश और कैसे भारत ने लिया बदला? ऑपरेशन सिंदूर से ऑप महादेव तक पूरी कहानी
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By Samridh Media Desk
पहलगाम हमले के बाद सबसे पहले भारत ने कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर कदम उठाए। 23 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो हमले के वक्त सऊदी अरब में थे, दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। अगले ही दिन सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया गया। इसी दिन अटारी सीमा बंद कर दी गई, पाकिस्तानियों के सार्क वीजा रद्द किए गए और पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी गई। उसी दिन गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर पहुंचे, उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की गई, एनआईए घटनास्थल पर पहुंची और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकियों के स्केच जारी किए। पहलगाम हमले की बरसी पर ‘आतंकिस्तान’ ने फिर उगला जहर, शहबाज शरीफ के मंत्री ने भारत से मांगे सबूत
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस सैन्य कार्रवाई के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसे भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा गया। भारतीय संसद में ऐसा क्या हुआ था, कि पाकिस्तान में मच गया था सियासी भूचाल?
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नई दिल्ली: लोकसभा में भारत सरकार के स्पष्ट और तथ्यात्मक बयान के बाद, पाकिस्तान एक बार फिर अपनी पुरानी आदत पर उतर आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय संसद में उठाए गए गंभीर मुद्दों और आरोपों को लेकर पाकिस्तान... मैदान पर मैच से पहले माइंड गेम, IndvsPak मैच को लेकर अज़हर की बात में छिपा है राज़!
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अज़हरुद्दीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर है। विदेशी नहीं, देशी चैनल से रुकवाया गया युद्ध: जयशंकर ने संसद में खोली ऑपरेशन सिंदूर की सारी परतें
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में अमेरिका या पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल से 17 जून के बीच प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच कोई कॉल ही नहीं हुआ। युद्धविराम की प्रक्रिया पाकिस्तान के DGMO द्वारा शुरू हुई थी और भारत ने इसे अपनी शर्तों पर स्वीकार किया। जयशंकर ने कहा कि भारत ने अपने सैन्य और राजनीतिक लक्ष्य पूरा कर लिए थे और कोई विदेशी दबाव नहीं था। ट्रंप का दावा निराधार है। 