corruption poem Hindi
साहित्य 

कैसी है सरकार? — व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर तीखी सामाजिक कविता

कैसी है सरकार? — व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर तीखी सामाजिक कविता राजेश पाठक की कविता “कैसी है सरकार?” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाती है। कविता में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक अवसरवाद और आम जनता की परेशानियों को मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया गया है।
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