साहिबगंज में आग उगल रहा आसमान, पारा 40 पार, ठंडे पेय पदार्थों ने तोड़े रिकॉर्ड
दोपहर में सन्नाटा, शाम होते ही बाजारों में उमड़ रही भीड़
साहिबगंज में भीषण गर्मी और उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं। वहीं शाम होते ही कुल्फी, लस्सी, जूस, गोला और शरबत की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ रही है।
संजना कुमारी
साहिबगंज: मई माह के दूसरे पक्ष की भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। तापमान 40 डिग्री पार कर गया है। दोपहर 12 से 4 बजे तक सड़कें वीरान हो जाती हैं। घर से निकलते ही लू के थपेड़े चेहरे को झुलसा देते हैं। ऐसे में साहिबगंज के लोग गर्मी से बचने के लिए 'ठंडे कारोबार' को हिट करा रहे हैं।
दोपहर सूनी, शाम को मेला
कुल्फी वाले की चांदी

लस्सी-गोला-शरबत: सबका रेट हाई
गर्मी में सिर्फ कुल्फी नहीं, हर ठंडी चीज सोना बन गई है। कॉलेज रोड पर लस्सी बेचने वाले संजय यादव कहते हैं, पहले दिन में 3 कैन दूध लगता था, अब 9 कैन लग रहा है। 25 रुपये ग्लास, मलाई मारके 30 की। रोज 250 ग्लास पार। 6 हजार से ऊपर की बिक्री है। वहीं, बर्फ का गोला 10 से 30 रुपये तक बिक रहा है। सुमित आइस गोला मटका कुल्फी वाले सुमित कुमार ने जिरवाबाड़ी में बताया कि, स्कूल छूटते ही 100-150 गोले बन जाते हैं। ऑरेंज, काला खट्टा, कच्चा आम - सब डिमांड में हैं। मजदूर वर्ग की पहली पसंद बेल का शरबत, आम का पना और चना का सत्तू 20 रुपये ग्लास मिल रहा है। ठेले वाले शंकर ने बताया कि दोपहर में रिक्शा वाले, ठेला वाले और मजदूर वर्ग के लोग 2-2 ग्लास पी जाते हैं। गन्ने का जूस 15 से 20 रुपये प्रति ग्लास उपलब्ध है।
तरबूज-खीरा-ककड़ी का राज
सब्जी मंडी में टमाटर को कोई नहीं पूछ रहा, पर तरबूज 20 रुपये किलो, खीरा 40 रुपये किलो और ककड़ी 30 रुपये किलो हाथों-हाथ बिक रही है। फल विक्रेता अजय साह कहते हैं, गर्मी में तरबूज पानी की कमी पूरी करता है। दिन में 5 क्विंटल माल बिक जा रहा है।
डॉक्टर की चेतावनी
सदर अस्पताल के डॉ. अनिल कुमार कहते हैं, ओपीडी में लू, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त के केस 40 प्रतिशत बढ़ गए हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा चपेट में हैं। 11 से 4 बजे तक घर से न निकलें। सूती कपड़े पहनें और सिर ढकें। बाहर का बर्फ-गोला खाने से बचें, डायरिया का खतरा है। घर का बना नींबू पानी, बेल शरबत, ओआरएस सबसे बेहतर है। घर से निकलते समय पानी की बोतल, छाता, गमछा रखने की अपील की है। वहीं, सामाजिक संगठनों ने घर की छत या बालकनी में पशु-पक्षियों के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी रखने की अपील की।
बिजली-पानी का संकट भी बढ़ा
गर्मी के साथ बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किल और बढ़ा दी है। दिन में 4-5 घंटे की कटौती हो रही है। इन्वर्टर जवाब दे जा रहे हैं। नगर परिषद के टैंकर से पानी सप्लाई भी नहीं हो रही है। पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। साहिबगंज इस वक्त भट्टी बना हुआ है। पर इस आग में किसी का घर जल रहा है तो किसी का चूल्हा। कुल्फी वाले राजू के लिए यही गर्मी 'सीजन' है, तो दिहाड़ी मजदूर के लिए 'सजा'।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
