मनिहारी-साहिबगंज गंगा ब्रिज अंतिम चरण में, दिसंबर 2026 में लिखेगा कई राज्यों की नई तकदीर
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साहिबगंज और बिहार के मनिहारी को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित गंगा पुल अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। करीब 2000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एनएचएआई के अनुसार दिसंबर 2026 तक पुल को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
संजय कुमार धीरज
साहिबगंज: झारखंड के साहिबगंज जिले को बिहार के मनिहारी से जोड़ने वाला निर्माणाधीन गंगा पुल सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि आधी सदी के इंतजार का प्रतीक है। करीब 2000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह मेगा परियोजना तीन बार डेडलाइन चूकने के बाद अब इतिहास रचने की दहलीज पर पहुंच गई है। एनएचएआई ने दावा किया है कि दिसंबर 2026 तक हर हाल में यह पुल आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
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दिसंबर 2026 में बदलेगी संथाल परगना की तस्वीर

इस पुल का लाभ सिर्फ झारखंड और बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और नेपाल तक के लोगों को इसका फायदा मिलेगा। संथाल परगना क्षेत्र के लिए यह परियोजना किसी गेम चेंजर से कम नहीं मानी जा रही है।
डेडलाइन का दर्द: कोरोना से चक्रवात तक
परियोजना को पहले अक्टूबर 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य था। इसके बाद इसे अप्रैल 2025 और फिर दिसंबर 2026 तक बढ़ाया गया। कोरोना महामारी, यास चक्रवात से दो पिलरों को हुए नुकसान तथा लगातार मानसून के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। हालांकि अब निर्माण एजेंसी डीबीएल की मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं।
फेरी सेवा बंद, नाव के सहारे लोग
पुल बनने तक गंगा पार करने के लिए स्टीमर और फेरी सेवा ही लोगों का मुख्य सहारा थी। 31 मार्च 2026 को झारखंड की बंदोबस्ती अवधि समाप्त हो गई। इसके बाद बिहार सरकार ने 11.26 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया, लेकिन कोई एजेंसी सामने नहीं आई। परिणामस्वरूप फेरी सेवा बंद हो गई और लोग आज भी जोखिम उठाकर नाव से गंगा पार करने को मजबूर हैं।
संघर्ष समिति ने जताई उम्मीद
गंगा पुल निर्माण संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने कहा कि यह सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीदों का प्रतीक है। एक पुल बनने से व्यापार, खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों का सपना अब पूरा होने के करीब है।
वहीं, समिति के केंद्रीय प्रवक्ता रामजी ठाकुर ने कहा कि बीते दशकों में कई सरकारें आईं और गईं, कई शिलान्यास हुए और डेडलाइन भी टूटीं, लेकिन अब गंगा पर खड़े पिलर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इंतजार की घड़ियां समाप्त होने वाली हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2026 में जब इस पुल पर पहली गाड़ी दौड़ेगी, तो वह सिर्फ एक वाहन नहीं होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं का प्रतीक बनेगा।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


