नाथवानी की जीत से झारखंड भाजपा को मिला बूस्टर डोज, रणनीति रही सफल, आदित्य साहू भी हुए मजबूत
राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह
राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत को झारखंड भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस जीत से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की स्थिति भी मजबूत हुई है।
सुनील सिंह
रांची: राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की जीत से भाजपा खेमे में उत्साह है। पार्टी में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, क्योंकि झारखंड में लंबे समय के बाद पार्टी को बूस्टर डोज मिला है।


भाजपा और एनडीए के पास अपना पर्याप्त संख्या बल नहीं था। इसलिए पार्टी के रणनीतिकारों ने अपने सभी नेताओं, यहां तक कि राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से झारखंड भेजे गए गौरव वल्लभ की दावेदारी को भी खारिज कर दिया। नाथवानी को समर्थन दिया और परिणाम सामने है।
नाथवानी ने भले अपने बूते वोट मैनेज कर जीत हासिल की हो, लेकिन इसके पीछे भाजपा की रणनीति भी थी। भाजपा ने हर कदम पर नाथवानी का साथ दिया। दोनों ने मिलकर जीत की रणनीति बनाई। भाजपा और एनडीए के विधायकों में किसी तरह की फूट न पड़े, इसे लेकर भाजपा का प्रदेश नेतृत्व सजग रहा। मतदान के दो दिन पहले सभी विधायकों को एक होटल में शिफ्ट कर दिया गया।
प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के बीच लगातार संवाद होता रहा। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी रणनीतिकारों में शामिल थे। चुनाव को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व ने विजय शर्मा को झारखंड की जिम्मेदारी दी थी।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान ही नितिन नवीन झारखंड आए थे। दो दिनों तक झारखंड में रहकर उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सफलता के टिप्स दिए और टास्क भी देकर गए। उन्होंने कहा कि झारखंड में अगली सरकार भाजपा बनाएगी। इस दिशा में अभी से प्रयास शुरू हो चुका है। नाथवानी जैसा एक मजबूत राज्यसभा सांसद भी भाजपा को मिल गया है, जिसका लाभ पार्टी को मिलता रहेगा।
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू भी लगातार पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं। इसमें उन्हें सफलता भी मिल रही है। वह काफी मेहनत कर रहे हैं। आदित्य साहू के अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा का चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल था। यह आदित्य साहू और पार्टी दोनों के लिए अग्निपरीक्षा भी थी। इस परीक्षा में पार्टी ने शानदार सफलता हासिल की। भले ही नाथवानी उम्मीदवार के तौर पर दूल्हा थे, लेकिन धूमधाम से बारात निकलने का श्रेय भाजपा और एनडीए को ही जाता है। चुनावी जीत से आदित्य साहू भी मजबूत हुए हैं। कार्यकर्ताओं में जो उत्साह दिख रहा है, उसका असर आगे भी देखने को मिल सकता है।
नाथवानी की जीत से इंडिया गठबंधन में दरार पड़ गई है। क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद गठबंधन में तनाव और घमासान की स्थिति है। कांग्रेस, राजद और माले एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इंडिया गठबंधन का कमजोर होना भी भाजपा के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
सरकार की सेहत भी अच्छी नहीं बताई जा रही है। अंदरखाने नए सत्ता समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हैं। कांग्रेस सरकार से बाहर हो सकती है और राज्य में गैर-कांग्रेस, गैर-भाजपा सरकार बनने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। सरकार बनाने को लेकर पर्याप्त संख्या बल होने की बातें राजनीतिक गलियारों में कही जा रही हैं।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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