कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे निजी अस्पताल, मौतों के बाद भी खामोश स्वास्थ्य महकमा

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल

कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे निजी अस्पताल, मौतों के बाद भी खामोश स्वास्थ्य महकमा
एपेक्स अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा

बोकारो जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। को-ऑपरेटिव कॉलोनी स्थित एपेक्स अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग मरीज गामा यादव की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही, अत्यधिक दवा देने और समय पर जानकारी नहीं देने के आरोप लगाए हैं।

निर्मल महाराज

बोकारो : बोकारो जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी चरम पर पहुंचती नजर आ रही है। लगातार मरीजों की मौत और उसके बाद उठ रहे लापरवाही के आरोप स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। हाल के दिनों में आशा नर्सिंग होम, शिव नर्सिंग होम, वृंदावन नर्सिंग होम समेत कई निजी अस्पतालों पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगे हैं। आरोप है कि दलालों के माध्यम से मरीजों को इन अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है और इलाज के दौरान उनकी मौत हो जाती है। इसके बाद परिजन हंगामा करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मामला शांत हो जाता है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बोकारो जिले में कई ऐसे निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनका कागजों पर पंजीकरण 30 या 50 बेड का है, लेकिन वास्तविकता में वहां मात्र 10 से 15 बेड ही उपलब्ध हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन अस्पतालों का पंजीकरण किस आधार पर किया जाता है। साथ ही, कई निजी अस्पतालों में आरएमओ (रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर) तक नहीं हैं।

यदि जिले के सभी निजी अस्पतालों की गहन जांच की जाए, तो कई खामियां उजागर हो सकती हैं और उनकी मनमानी पर रोक लग सकती है। इससे मरीजों की जान बचाने में भी मदद मिलेगी।

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ताजा मामला को-ऑपरेटिव कॉलोनी स्थित एपेक्स अस्पताल का है, जहां भर्ती एक बुजुर्ग मरीज की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। मृतक की पहचान चास के जोधाडीह मोड़ निवासी गामा यादव के रूप में हुई है।

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परिजनों के अनुसार, सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें एपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतक के पुत्र सूरज यादव का आरोप है कि इलाज के दौरान उनके पिता को कई बार नींद के इंजेक्शन दिए गए, हाथ-पैर बांधकर रखा गया और अत्यधिक दवाओं के कारण उनकी हालत बिगड़ती चली गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मौत के बाद भी मरीज को ड्रिप से जोड़े रखा गया और समय पर उन्हें जानकारी नहीं दी गई।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव और हंगामे की स्थिति बन गई। हालांकि, अस्पताल संचालक अमित कुमार सिंह ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज की स्थिति पहले से ही गंभीर थी और बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की सलाह दी गई थी। उनके अनुसार, अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब हाल ही में पिंड्राजोड़ा थाना क्षेत्र स्थित शिव हॉस्पिटल में प्रसूता लक्ष्मी कुमारी की मौत को लेकर भी परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए थे। परिजनों का दावा था कि पूरी रात मरीज दर्द से तड़पती रही, चिकित्सक मौजूद नहीं थे और हालत बिगड़ने के बावजूद उसे रेफर नहीं किया गया। घटना के बाद अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मियों के अस्पताल छोड़कर चले जाने की बात भी सामने आई थी।

इससे पहले भी जिले के अन्य निजी अस्पतालों पर नवजात और मरीजों की मौत को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई मामलों में विरोध-प्रदर्शन और जांच की मांग हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

एपेक्स अस्पताल मामले में मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि चिकित्सीय जांच या पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने निजी अस्पतालों की कार्यशैली, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।

आम लोगों का सवाल है कि यदि इलाज के नाम पर लापरवाही हो रही है, तो जवाबदेही तय कौन करेगा और पीड़ित परिवारों को न्याय कब मिलेगा?

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Edited By: Mohit Sinha
Mohit Sinha Picture

Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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