Hazaribagh News: विभावि की ऐतिहासिक पहल: 'सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज' के रूप में विकसित होगा विनोबा भावे विश्वविद्यालय
कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने दिया 'तारे जमीन पर' का उदाहरण
हजारीबाग के विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) को 'सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज' के रूप में विकसित किया जाएगा, जो विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Learning Disability) वाले शिक्षार्थियों को मुख्य धारा में शामिल करने का कार्य करेगा। विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आइक्यूएसी (IQAC) और 'द कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग - सेमका' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय 'शिक्षकों का क्षमता निर्माण कार्यशाला' के उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने इसकी घोषणा की। इस अवसर पर नई दिल्ली से जुड़े सेमका के निदेशक डॉ. बशीरहमद शडरेख ने आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 और भारत सरकार के 'BUILD' कार्यक्रम की चर्चा करते हुए विशेष बच्चों के लिए डिजिटल और सॉफ्टवेयर सपोर्ट की आवश्यकता पर जोर दिया।
हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग को 'सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय एक ऐसे केंद्र के रूप में कार्य करेगा जो विद्यालय और महाविद्यालय में पढ़ रहे विशिष्ट अधिगम अक्षमता वाले शिक्षार्थियों को मुख्य धारा में शामिल करने पर कार्य करेगा। उक्त बातें विभावि के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने सोमवार को कहीं।
वह स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित तीन दिवसीय 'शिक्षकों का क्षमता निर्माण कार्यशाला' के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला का आयोजन आइक्यूएसी, विभावि तथा 'द कॉमनवेल्थ ऑफ़ लर्निंग - सेमका (CEMCA) ' के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला में लगभग 50 लोगों की छोटी टोली बनाई गई है ताकि बेहतर प्रशिक्षण दिया जा सके। ऐसे लोग मास्टर ट्रेनर बन के सक्षमता-दूत की भूमिका में होंगे।
कार्यक्रम को नई दिल्ली 'द कॉमनवेल्थ ऑफ़ लर्निंग' के सेमका के निदेशक डॉ बशीरहमद शडरेख ने वर्चुअल मोड में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय भारत का पहला विश्वविद्यालय है जो इस कार्य को लेकर कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने विभावि के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा को इसका श्रेय देते हुए उनकी सराहना की। डॉ शडरेख ने ऐसे बच्चों को 'विशेष रूप से प्रतिभाशाली (specially gifted)' कहा। इस संबंध में उन्होंने आरपीडब्ल्यूडी (RPwD) एक्ट 2016 के विभिन्न प्रावधानों की चर्चा की। भारत सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय का संवेदीकरण कार्यक्रम बिल्ड (BUILD) की भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अब ऐसे विद्यार्थियों के लिए सिर्फ रैंप और लिफ्ट की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं है। अब इन्हें डिजिटल सपोर्ट देनी होगी, सॉफ्टवेयर पर काम करना होगा। कार्यक्रम में समायोजन (accommodation), सुलभन (accessible) तथा आकलन (assessment) के महत्व को भी बताया।
बताया कि अल्बर्ट आइंस्टीन और अगाथा क्रिस्टी जैसे विश्व विख्यात लोग भी इस तरह की अक्षमता से पीड़ित थे। यदि इस तरह के बच्चों के बारे में अभी नहीं सोचेंगे तो भविष्य के आइंस्टीन और क्रिस्टी जैसे 'आउट ऑफ बॉक्स' चिंतन करने वाले लोगों को हम खो देंगे।
उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ कनुप्रिया गुप्ता ने किया। मौके पर संसाधन सेवी आकांक्षा अग्रवाल एवं सुमन चौधरी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन सचिव तथा आइक्यूएसी के निदेशक डॉ अविनाश कुमार ने बताया कि पहले दिन तीन अलग-अलग तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया।
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