गिरिडीह कॉलेज में एफडीपी कार्यशाला के 5वें दिन एआई टूल्स और ज्ञान परंपरा पर मंथन
डॉ. सुमित परोई ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर दिया व्याख्यान
गिरिडीह कॉलेज में आयोजित छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के पाँचवें दिन भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान और शिक्षा में एआई एथिक्स (कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक नियमों) पर गहन विमर्श हुआ। काजी नजरुल विश्वविद्यालय के डॉ. सुमित परोई और बीएचयू के डॉ. राज सिंह ने विषय विशेषज्ञ के रूप में शिक्षकों को आधुनिक एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
गिरिडीह: गिरिडीह कॉलेज में आयोजित छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आज कार्यशाला का पाँचवाँ दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग तथा आईयूसीटीई, बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में आज चार सत्रों का आयोजन किया गया।
प्रथम एवं द्वितीय सत्र में डॉ. सुमित परोई ने “भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान एवं सामुदायिक सहभागिता” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था एक विविधतापूर्ण एवं बहुआयामी प्रणाली थी, जिसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र निर्माण करना था।


सत्र समापन वक्तव्य में स्कॉलर बी.एड. कॉलेज की डीएलएड प्राचार्या हरदीप कौर ने डॉ. सुमित परोई के व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि उनके विचारों ने भारतीय ज्ञान परंपरा और शोध संस्कृति के बीच गहरे संबंधों को समझने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने विषय विशेषज्ञ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक एवं चिंतनपरक रहा।
तृतीय सत्र में डॉ. राज सिंह ने “शिक्षा एवं अनुसंधान में एआई एथिक्स” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ज्ञान और विचार किसी भी स्रोत से प्राप्त हों, यदि वे मानवता और समाज के हित में हों तो उन्हें ग्रहण करने में संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तकनीक के दो पक्ष होते हैं। जिस प्रकार विज्ञान का उपयोग एक ओर मानव कल्याण और नई खोजों के लिए किया जाता है, वहीं दूसरी ओर उससे विनाशकारी हथियार भी बनाए जा सकते हैं।
इसी प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भी सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई को समाज और शिक्षा के हित में उपयोगी बनाने के लिए शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को स्वयं अधिक सक्रिय, जागरूक और उत्तरदायी भूमिका निभानी होगी। कार्यक्रम के समापन पर सुभाष टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, गिरिडीह की सहायक प्राध्यापिका मीरा महतो ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बलभद्र सिंह ने किया तथा प्राचार्य डॉ. मृगेन्द्र नारायण सिंह ने विषय विशेषज्ञों, विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्रतिभागियों, गिरिडीह कॉलेज के शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। बालेंदु शेखर त्रिपाठी, डॉ गुलाम समदानी, डॉ श्वेता कुमारी और सुशीला चंद्रा ने कार्यक्रम संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाया, कार्यक्रम में लंगटा बाबा कॉलेज, मिर्जागंज, आदर्श कॉलेज, राजधनवार, के. एन. बख्शी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, स्कॉलर बी.एड. कॉलेज, सुभाष टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, पारसनाथ कॉलेज, ईसरी बाजार तथा गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह के अनेक शिक्षक सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं।
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