भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफल लॉन्च, अंतरिक्ष क्षेत्र में रचा इतिहास
श्रीहरिकोटा से स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण
भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का शनिवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया गया। स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस मिशन का नाम 'मिशन आगमन' रखा गया है।
नई दिल्ली। भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 शनिवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हो गया।
इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसके सफल प्रक्षेपण पर स्काईरूट एयरोस्पेस और उसके वैज्ञानिकों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका से फोन पर बात कर कहा कि स्काईरूट ने आकाश में अपनी जड़ें गाड़ दी हैं और जमीन पर भी उन जड़ों को मजबूत किया है, जो देश के युवाओं को प्रेरणा देंगी।
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प्रधानमंत्री ने कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना से इसरो के दफ्तर में फोन पर बात करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सफलता ने दिखा दिया है कि भारत निजी क्षेत्र की भागीदारी से भी अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में सक्षम है। स्काईरूट की युवा टीम ने प्रतिबद्धता और मेहनत से भारत मां की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उन्होंने इसे 'वंदे मातरम मिशन' की तरह बताया और कहा कि यह नई पीढ़ी को तकनीक का लाभ देने और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने का काम करेगा। उन्होंने स्काईरूट टीम को जल्द मिलने का निमंत्रण भी दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "एक समय था, जब मैं आत्मनिर्भर भारत की बात करता था, तो नासमझी में लोग उसका मजाक उड़ाते थे। आज आपने सिद्ध कर दिया कि इस क्षेत्र में भी हम आत्मनिर्भर बनने के लिए समर्थ हैं। उस सामर्थ्य को आपने कर दिखाया।"
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 की लॉन्चिंग का आईसीएमआर से सीधा प्रसारण देखा। उन्होंने इसके सफलतापूर्वक प्रक्षेपण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
इस मौके पर उन्होंने सभी वैज्ञानिकों को मिठाई खिलाई। उन्होंने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई दी।
डॉ. सिंह ने कहा, "स्काईरूट एयरोस्पेस को विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर हार्दिक बधाई। भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल का यह मिशन देश के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष तकनीकी क्षमता और विकसित हो रही स्पेस इकोनॉमी का प्रमाण है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
विक्रम-1 की खासियत
विक्रम-1 चार-स्टेज वाला ऑर्बिटल रॉकेट है, जो लगभग 20 मीटर ऊंचा और 1.7 मीटर व्यास वाला है। इसके पहले तीन स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन पर काम करते हैं, जबकि चौथा स्टेज ऑर्बिट में पहुंचने और सटीक मूवमेंट के लिए लिक्विड इंजन का इस्तेमाल करता है। इसे पूरी तरह से कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बनाया गया है।
विक्रम-1 में 3डी-प्रिंटेड इंजन और हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल बूस्टर लगे हैं। इसे 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे सैटेलाइट को लो-अर्थ ऑर्बिट में ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


