ऑस्ट्रेलिया लौटाएगा भारत की तीन प्राचीन धरोहरें, भद्रकाली, नंदी और कार्तिकेय की दुर्लभ प्रतिमाएं आएंगी वापस
भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय सहयोग के तहत होगी धरोहरों की वापसी
ऑस्ट्रेलिया भारत को तीन महत्वपूर्ण प्राचीन धार्मिक कलाकृतियां लौटाने जा रहा है। इनमें देवी भद्रकाली की आकृति वाला धातु का त्रिशूल, भगवान शिव के वाहन नंदी की पत्थर की प्रतिमा और छह मुख वाले भगवान कार्तिकेय की दुर्लभ मूर्ति शामिल हैं।
नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया भारत को तीन महत्वपूर्ण प्राचीन धार्मिक कलाकृतियां लौटाने जा रहा है। इनमें देवी भद्रकाली की आकृति वाला धातु का त्रिशूल, भगवान शंकर के वाहन नंदी की पत्थर की प्रतिमा और छह मुख वाले भगवान कार्तिकेय की एक दुर्लभ प्रतिमा शामिल है। तमिलनाडु के मंदिरों से जुड़ी ये कलाकृतियां चोल और विजयनगर-नायक काल से जुड़ी हुई हैं और इन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों के तहत इन प्राचीन धरोहरों को जल्द ही पूरे सम्मान के साथ भारत वापस लाया जाएगा। मुख्य कलाकृतियों में देवी भद्रकाली की छवि वाला धातु का त्रिशूल, यह एक औपचारिक त्रिशूल है, जिसके शीर्ष पर शक्ति के उग्र रूप 'देवी भद्रकाली' की छवि अंकित है। शैव-शक्ति परंपरा में इसे सुरक्षा, बुराई के विनाश और दैवीय शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसे धार्मिक पूजा के लिए दक्षिण भारतीय मंदिर अनुष्ठान की पारंपरिक धातु-कला शैली में तैयार किया गया था। यह कलाकृति तमिलनाडु के कोल्लुमांगुडी स्थित 'श्री काशीविश्वनाथस्वामी मंदिर' की है। इस मंदिर का निर्माण 13वीं से 16वीं शताब्दी के बीच चोल काल के अंतिम चरण से लेकर विजयनगर नायक काल के दौरान हुआ था।


कार्तिकेय की पत्थर की मूर्तिः यह दुर्लभ पाषाण मूर्ति भगवान शिव के पुत्र छह सिर वाले कार्तिकेय (मुरुगन या षणमुख) को दर्शाती है, जिन्हें ज्ञान, वीरता और दैवीय सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। मूर्ति में उन्हें 12 भुजाओं के साथ दिखाया गया है, जिनमें उनका मुख्य अस्त्र 'वेल' (भाला) व अन्य हथियार शामिल हैं। उनके साथ उनका वाहन मोर भी उत्कीर्ण है। यह मूर्ति चोल-कालीन मूर्तिकला परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपने बेहतरीन शारीरिक अनुपात और सजीव नक्काशी के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यह बहुमूल्य मूर्ति तमिलनाडु के तंजावुर जिले के मनमबाड़ी गांव स्थित नागनाथस्वामी मंदिर की है। इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी ईस्वी की शुरुआत में सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान किया गया था।
ऑस्ट्रेलिया से प्राचीन और बहुमूल्य कलाकृतियों की भारत वापसी दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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