बरहरवा स्टेशन: अवैध शराब और मानव तस्करी का क्यों बन रहा हब?
तीन राज्यों की सीमा पर स्थित स्टेशन बना तस्करों का आसान ट्रांजिट पॉइंट
झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित बरहरवा रेलवे स्टेशन इन दिनों अवैध शराब और मानव तस्करी के मामलों को लेकर चर्चा में है। आरपीएफ और जीआरपी की लगातार कार्रवाई में यहां से नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया जा रहा है और शराब की खेप बरामद हो रही है।
संजय कुमार धीरज की खास रिपोर्ट
साहिबगंज: झारखंड-बिहार-बंगाल की सीमा पर बसा बरहरवा रेलवे स्टेशन लगातार अवैध शराब तस्करी और मानव तस्करी के मामलों को लेकर चर्चा में है। पिछले कुछ महीनों में आरपीएफ और जीआरपी की कार्रवाई में यहां से लगातार विदेशी शराब की बड़ी खेप और नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। सवाल उठता है कि आखिर बरहरवा स्टेशन ही क्यों तस्करों की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है?
तीन राज्यों की सीमा और प्रमुख जंक्शन

लेबर माइग्रेशन का बड़ा रूट

शराब तस्करी का ट्रांजिट पॉइंट
बिहार में शराबबंदी के बाद से झारखंड-बंगाल बॉर्डर से बिहार में शराब भेजने का धंधा तेज हुआ है। तस्कर बंगाल से सस्ती शराब खरीदकर ट्रेन के जरिए बिहार ले जाते हैं। बरहरवा स्टेशन इस रूट का अहम ट्रांजिट पॉइंट है। 16 जून को ही आरपीएफ ने ट्रेन नंबर 13409 से 4.87 लीटर विदेशी शराब लावारिस हालत में बरामद की थी। सीट के नीचे बैग रखकर तस्कर निकल जाते हैं।
स्टेशन पर भीड़ और सुरक्षा में कमी
बरहरवा एक बड़ा स्टेशन है जहां दिनभर यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। भीड़ का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से सामान और बच्चों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। हालांकि अब आरपीएफ और सीपीडीएस की टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं, फिर भी लोकेशन की वजह से चुनौती बनी रहती है।
आरपीएफ का अभियान तेज
आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि "ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते" और "ऑपरेशन सतर्क" के तहत रोजाना सघन जांच की जा रही है। संदिग्ध लोगों, लावारिस बैग और अकेले यात्रा कर रहे बच्चों पर नजर रखी जा रही है। पिछले 6 महीने में यहां से 20 से ज्यादा नाबालिग रेस्क्यू किए गए और दर्जनों शराब की खेप पकड़ी गई है।
क्या है समाधान?
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ पुलिस कार्रवाई काफी नहीं है। सीमावर्ती गांवों में जागरूकता, गरीब परिवारों के लिए रोजगार और स्टेशनों पर सीसीटीवी व महिला सुरक्षा टीम बढ़ाने की जरूरत है। जब तक पलायन और गरीबी रहेगी, तस्कर बरहरवा जैसे जंक्शन स्टेशनों को निशाना बनाते रहेंगे। फिलहाल बरहरवा स्टेशन तस्करों के लिए आसान रास्ता है, लेकिन आरपीएफ की सख्ती से अब यहां उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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