Sahebganj News : नगर परिषद की सत्ता पर ‘कुर्सी संग्राम’ तेज, कौन बनेगा नगर परिषद उपाध्यक्ष?

दावेदारी पर सियासी सरगर्मी चरम पर

Sahebganj News : नगर परिषद की सत्ता पर ‘कुर्सी संग्राम’ तेज, कौन बनेगा नगर परिषद उपाध्यक्ष?
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साहिबगंज नगर परिषद की उपाध्यक्ष कुर्सी पर सियासी सरगर्मी चरम पर है। रामनाथ पासवान की अध्यक्षता के बाद उपाध्यक्ष पद के लिए गठबंधन के भीतर खींचतान और तीसरे मोर्चे की सक्रियता सामने आई है।

साहिबगंज : नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजे आते ही नगर परिषद की राजनीति खुलकर सामने आ गई है। अध्यक्ष पद पर इंडिया महागठबंधन समर्थित रामनाथ पासवान उर्फ छोटू पासवान की भारी जीत के बाद अब असली जंग उपाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर शुरू हो चुकी है।

मतगणना खत्म होते ही वार्ड पार्षदों के मोबाइल फोन देर रात तक बज रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि सत्ता की असली बाजी अब खेली जा रही है। 28 वार्डों में कई पुराने चेहरों की विदाई और नए पार्षदों की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या उपाध्यक्ष का चयन जनादेश के आधार पर होगा या राजनीतिक जोड़-तोड़ के दम पर?

अल्पसंख्यक समुदाय से उपाध्यक्ष बनाने की मांग तेज हो गई है। तर्क दिया जा रहा है कि चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले मतदाताओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। परंतु विरोधी दल इसे खुला “वोट बैंक राजनीति” करार दे रहे हैं।

गठबंधन के भीतर भी अंदरूनी खींचतान सामने आ रही है। चर्चा है कि अध्यक्ष एक दल से होने के कारण उपाध्यक्ष सहयोगी दल को दिया जाएगा। कांग्रेस समर्थित पार्षदों के नाम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। हालांकि, यह भी सच है कि अभी तक कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर गठबंधन धर्म के नाम पर दबाव बनाया गया तो असंतोष पनप सकता है।

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इधर तीसरा मोर्चा भी सक्रिय है। आरोप है कि मतगणना हॉल से ही पार्षदों को अपने खेमे में करने की कोशिश शुरू हो गई थी। बंद कमरों में बैठकों का दौर और “लुभावने प्रस्ताव” चर्चा का विषय बने हुए हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या यह जनादेश का सम्मान है या सत्ता के लिए सियासी सौदेबाजी?

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सबसे बड़ा राजनीतिक प्रहार यही है कि चुनाव से पहले पारदर्शिता और विकास की बात करने वाले दल अब समीकरण साधने में लगे हैं। क्या उपाध्यक्ष का चयन योग्यता और अनुभव के आधार पर होगा, या केवल जातीय और सामुदायिक गणित पर? फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि नगर परिषद की उपाध्यक्ष कुर्सी अब सियासी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि जनादेश की मर्यादा बचती है या फिर राजनीति का खेल भारी पड़ता है।

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Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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