Sahebganj News: पत्थर खनन और स्टोन क्रशर दूरी नियम पर हाईकोर्ट का फैसला टला, प्रदूषण बोर्ड ने मांगा 4 हफ्ते का समय
मुख्य न्यायाधीश महेश शरदचंद्र सोनक की खंडपीठ में सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट में पत्थर खनन (500 मीटर) और स्टोन क्रशर (400 मीटर) की वन भूमि से न्यूनतम दूरी तय करने के नियम पर अंतिम फैसला टल गया है। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का समय मांगने के बाद मुख्य खंडपीठ ने अगली सुनवाई 30 जुलाई तय की है।
साहिबगंज: झारखंड में पत्थर खनन और स्टोन क्रशर से जुड़े 500-400 मीटर दूरी नियम पर गुरुवार को हाईकोर्ट में अंतिम फैसला नहीं हो सका। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का समय मांगा, जिसे मुख्य खंडपीठ ने मंजूर कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश महेश शरदचंद्र सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने 16 अप्रैल को अंतरिम आदेश में कहा था कि वन भूमि की सीमा से पत्थर खनन के लिए 500 मीटर और स्टोन क्रशर लगाने के लिए 400 मीटर की न्यूनतम दूरी अनिवार्य होगी। प्रदूषण बोर्ड ने 2015 और 2017 में यह दूरी घटाकर 250 मीटर कर दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। यह नियम राज्य के सभी 24 जिलों पर लागू होगा।


सुनवाई टलने से सरकार और खदान-क्रशर कारोबारियों ने राहत की सांस ली है, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ताओं में मायूसी है। अब सबकी निगाहें 30 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि हाईकोर्ट 16 अप्रैल के अंतरिम आदेश को बरकरार रखता है तो राज्य के सैकड़ों स्टोन खदान और क्रशर पर ताला लगना तय माना जा रहा है।
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