साहिबगंज के पहाड़ी गांवों में आज भी 'कांधे पर अस्पताल', सड़क-एम्बुलेंस नहीं, चारपाई पर जिंदगी
बोरियो, बरहेट और पतना के कई गांवों में अब भी सड़क संपर्क नहीं
साहिबगंज जिले के पहाड़ी गांवों में आज भी सड़क और एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। हाल ही में वायरल हुई एक तस्वीर में ग्रामीणों को घायल महिला को अस्थायी स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाते देखा गया।
संजय कुमार धीरज
साहिबगंज : चमचमाते हाईवे और स्मार्ट सिटी के दावों से कोसों दूर साहिबगंज जिले का पहाड़ी इलाका आज भी मानो 19वीं सदी में जी रहा है। यहां न सड़क है और न ही एम्बुलेंस पहुंच पाती है। बीमार या घायल होने पर इलाज का मतलब है—चारपाई पर घंटों का सफर तय करना।
वायरल हुआ दर्द, कांधे पर जिंदगी
यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, रोज की कहानी है

इंसानियत जिंदा है, पर सिस्टम कहां है?
यह तस्वीर गांव वालों के जज्बे, हौसले और इंसानियत की मिसाल है। मुसीबत में एक-दूसरे का साथ देने की परंपरा यहां आज भी जिंदा है। लेकिन सवाल यह है कि आजादी के 78 साल बाद और जिला बनने के 42 वर्ष बाद भी एक बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए कंधों का सहारा क्यों लेना पड़ता है?
हर नागरिक को समय पर इलाज, सुरक्षित सफर और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा मिलना उसका संवैधानिक अधिकार है, कोई एहसान नहीं।
ग्रामीणों की पीड़ा
नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने कहा, "वोट के समय नेता हेलीकॉप्टर से पहुंच जाते हैं, लेकिन हमारा मरीज चारपाई पर दम तोड़ देता है। हमें सिर्फ सड़क और एम्बुलेंस चाहिए, और कुछ नहीं।"
अब सवाल यह भी उठता है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ इन पहाड़ी गांवों तक क्यों नहीं पहुंच पाया? 108 एम्बुलेंस सेवा जिले के अंतिम गांव तक क्यों नहीं पहुंचती? स्वास्थ्य विभाग की 'गोल्डन कार्ड' और 'हाट बाजार क्लिनिक' जैसी योजनाएं जमीन पर हैं या सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं?
ये पहाड़ के लोग हर दिन हिम्मत और उम्मीद के साथ संघर्ष कर रहे हैं। वे न रोते हैं, न भीख मांगते हैं। उनकी सिर्फ एक मांग है कि बीमारी के समय चारपाई एम्बुलेंस न बने और अस्पताल तक पहुंचने से पहले किसी की जिंदगी न छिन जाए।
विकास तब तक अधूरा है, जब तक आखिरी गांव का आखिरी व्यक्ति सम्मान के साथ अस्पताल तक न पहुंच सके।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
