पहली लड़ाई जीत गए नाथवानी, कांग्रेस का हाई वोल्टेज ड्रामा नहीं आया काम, सलमान खुर्शीद का आना भी हुआ बेकार
राधाकृष्ण किशोर और इरफान अंसारी ने लगाए गंभीर आरोप
रांची में राज्यसभा चुनाव को लेकर परिमल नाथवानी का नामांकन वैध घोषित होने पर कांग्रेसियों ने विधानसभा में जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया। दिल्ली से आए वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और कांग्रेस मंत्रियों के भारी विरोध व पक्षपात के आरोपों के बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर ने नाथवानी के पर्चे को सही पाया।
सुनील सिंह
रांची: राज्यसभा का चुनाव 18 जून को होना है। लेकिन इससे पहले ही 10 जून बुधवार को एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द करने को लेकर कांग्रेसियों ने झारखंड विधानसभा के अंदर और बाहर जमकर हंगामा किया। दिनभर हाई वोल्टेज ड्रामा चला। हंगामा करने वालों में कांग्रेस कोटे के चारों मंत्री भी शामिल थे। रिटर्निंग ऑफिसर विधानसभा के प्रभारी सचिव रंजीत कुमार पर हंगामा कर दबाव बनाने की पूरी कोशिश की गई।


इधर, मंगलवार को मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो गया था। इससे कांग्रेसियों में आक्रोश था। चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर पर दबाव बनाने के उद्देश्य से कांग्रेसियों ने सुबह विधानसभा के बाहर धरना- प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरना-प्रदर्शन में झारखंड कांग्रेस के तमाम बड़े नेता, विधायक और मंत्री शामिल हुए। कांग्रेसियों के हंगामें की खबर पर भाजपा कार्यकर्ता भी पहुंच गए। दोनों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई. तीखी नोकझोंक और नारेबाजी हुई। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। विधानसभा के बाहर और भीतर जमकर हंगामा हुआ।
कांग्रेस कोटे के चारों मंत्री राधाकृष्ण किशोर, इरफान अंसारी, दीपिका पांडे व शिल्पी नेहा तिर्की विधानसभा के अंदर चले गए। मंत्रियों ने रिटर्निंग ऑफिसर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए खूब हंगामा किया। दीपिका पांडे ने नाथवानी पर कर्मचारियों के बीच पांच सौ रुपए बांटने का आरोप भी लगाया। मंत्रियों ने यहां तक कहा कि उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। जबकि भाजपा के नेता और वकील अंदर में कैसे चले गए। नामांकन का विरोध करने दिल्ली से चार्टर प्लेन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मशहूर वकील सलमान खुर्शीद आए थे।
मंत्री का आरोप है कि सलमान खुर्शीद को रिटर्निंग ऑफिसर तक पहुंचने नहीं दिया गया उन्हें बाहर रोक दिया गया। दीपिका पांडे और इरफान अंसारी चुनाव आयोग और भाजपा पर खूब बरसे। आरोप लगाया कि नाथवानी का नामांकन रद्द करने के बदले उनसे नया शपथ पत्र लिया गया। भाजपा के दबाव पर रिटर्निंग ऑफिसर ने पक्षपात कर नामांकन स्वीकार किया है। रिटर्निंग ऑफिसर विधानसभा के प्रभारी सचिव हैं। इनकी नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष और सरकार ने ही की है. विरोध करने वाले सरकार के ही लोग थे।
हाई वोल्टेज ड्रामे के बावजूद नाथवाणी का नामांकन स्वीकार कर लिया गया। इस तरह पहली लड़ाई नाथवानी जीत गए। अब दूसरी लड़ाई मतदान की तिथि 18 जून को होगी। देखना है परिणाम क्या आता है। नाथवानी जितते हैं या हारते हैं। लेकिन इतना तय है कि नाथवानी के आने से कांग्रेस प्रत्याशी की मुश्किल बढ़ गई है। कांग्रेसियों ने उनका नामांकन रद्द करा यहीं रोकने की कोशिश की, पर सफलता नहीं मिली।
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