आईआईएम रांची में 18वें एमबीए (एग्जीक्यूटिव) समर बैच 2026-28 का शुभारंभ, नवाचार और नेतृत्व पर दिया गया जोर
आईआईएम रांची में MBA (Executive) समर बैच 2026-28 का विधिवत शुभारंभ
आईआईएम रांची में MBA (Executive) समर बैच 2026-28 का शुभारंभ हुआ। देशभर से आए कार्यरत पेशेवरों का स्वागत करते हुए संस्थान ने नेतृत्व, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उद्योग आधारित शिक्षा पर जोर दिया।
रांची: भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रांची में 18वें एमबीए (एग्जीक्यूटिव) समर बैच 2026-28 का विधिवत शुभारंभ हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कार्यरत पेशेवरों का संस्थान में स्वागत किया गया। दो वर्षीय इस कार्यक्रम का उद्देश्य अनुभवी पेशेवरों में नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक सोच और प्रबंधन कौशल का विकास करना है।
कार्यक्रम का स्वागत करते हुए एमबीए (एग्जीक्यूटिव) कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. मनीष बंसल ने प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक अतिरिक्त डिग्री नहीं, बल्कि नेतृत्व और पेशेवर विकास की परिवर्तनकारी यात्रा है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते कारोबारी माहौल में यह पाठ्यक्रम प्रतिभागियों को उच्च नेतृत्व की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करेगा।


बोइंग इंडिया की टेक्निकल लीड सुमरानी सुलीबेले मुनिराजू और हिंदाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के महाप्रबंधक सुमन मैती ने बताया कि आईआईएम रांची के इस कार्यक्रम ने उनके नेतृत्व कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और पेशेवर विकास को नई दिशा दी। उन्होंने यह भी बताया कि नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया।
आईआईएम रांची की डीन (अकादमिक) प्रो. तनुश्री दत्ता ने छात्रों को हर कक्षा और सीखने के अवसर का अधिकतम लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रबंधन शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि वास्तविक व्यावसायिक चुनौतियों का जिम्मेदारीपूर्वक समाधान कर संस्थानों में सकारात्मक बदलाव लाना है।
डीन, एग्जीक्यूटिव एजुकेशन एंड कंसल्टिंग (ईईसी) प्रो. अमित सचान ने प्रतिभागियों से कहा कि वे अपना पेशेवर अनुभव कक्षा में जरूर लाएं, लेकिन अहंकार को बाहर छोड़ दें। उन्होंने कहा कि एग्जीक्यूटिव एमबीए की सबसे बड़ी ताकत सामूहिक सीखने की प्रक्रिया है, जहां अनुभवी पेशेवर एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं आईआईएम रांची के पूर्व छात्र अनुज श्रीवास्तव, निदेशक, एएससीईएलए ग्लोबल, ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रतिभागियों को संकाय सदस्यों और सहपाठियों के साथ सक्रिय संवाद बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक उद्योग ऐसे नेताओं की तलाश में है, जिनके पास तकनीकी दक्षता के साथ मजबूत प्रबंधकीय क्षमता भी हो।
मुख्य वक्ता एवं भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 के दौर में प्रभावी नेतृत्व के लिए निरंतर सीखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे समय में केवल तकनीकी विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं है, बल्कि बदलते परिवेश के अनुसार स्वयं को ढालने, चुनौतियों को अवसर में बदलने, लोगों और तकनीक दोनों का प्रभावी प्रबंधन करने तथा सामूहिक समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक है।
उन्होंने प्रतिभागियों को तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए—जिज्ञासु बने रहें, अहंकार कम होगा तो ज्ञान बढ़ेगा और वास्तविक सफलता जटिल चीजों को सरल बनाने में है।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस शैक्षणिक यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त किया। संस्थान ने भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


