Bokaro News: विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी, झारखंड समेत पूर्वी भारत के कई शहर बने ऊष्मा द्वीप
अतिक्रमण के कारण छोटी जलधाराओं के अस्तित्व पर संकट
बोकारो के अग्रसेन भवन में विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बढ़ते प्रदूषण और कंक्रीट निर्माण पर चिंता जताई। आईआईटी धनबाद के प्रो. अंशुमाली और युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने बताया कि झारखंड में पांच वर्षों में हाईवे के लिए डेढ़ लाख पेड़ काटे गए हैं, जिससे कई शहर ऊष्मा द्वीप बन चुके हैं।
बोकारो: युगांतर भारती, दामोदर बचाओ आंदोलन, देवनद दामोदर क्षेत्र विकास ट्रस्ट, और नेचर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य पर बोकारो के अग्रसेन भवन में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतराष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगन्नाथ शाही ने कहा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यों को नित्य प्रतिदिन अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। सम्पूर्ण भारतवर्ष के लगभग पचास हज़ार स्थानों में पर्यावरण संबंधी कार्यशालाओं का यह संचालन करती है। यह प्रदूषण के विषय में, ग्लोबल वार्मिंग के विषय में पर्यावरण संरक्षण के विषय में अत्यधिक रुचि रखता है और यह इसका प्रमुख विषय है।


पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें केवल सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यह एक सामूहिक जिम्मेदारी का विषय है। पर्यावरण एवं इसके विभिन्न अवयवों को शुद्ध, सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ सामाजिक भागीदारी भी अत्यंत जरूरी है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि छोटे-छोटे अनेकों प्राकृतिक जलधाराओं को मिलाकर गरगा, कोनार, बोकारो जैसे जलस्रोतों का निर्माण होता है और ये सभी मिलकर दामोदर में मिलकर उसे विशालता प्रदान करते हैं। हमारी वास्तविक जिम्मेदारी उन छोटे-छोटे प्राकृतिक जल धाराओं के अस्तित्व को बचाना है, जो विकास के नाम पर हो रहे अतिक्रमणों के भेंट चढ़ रहे हैं।
उन्होंने चेताते हुए कहा कि अगर पृथ्वी में जल, हरियाली और वन चाहिए। यदि पृथ्वी में जीवन बचाए रखना है, तो हमें पृथ्वी के कुल भूभाग के 10 प्रतिशत भाग को जल के लिए आरक्षित रखना होगा। वही 10 प्रतिशत आरक्षित भूभाग शेष 90 प्रतिशत भूभाग के लिए वाटर बैंक का कार्य करेगा। यदि हम यह 10 प्रतिशत भूभाग को आरक्षित कर पाने में विफल रहे तो संसार में पीने का पानी, खाद्य पदार्थ, अनाज के लिए भीषण हाहाकार मचेगा, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते है।
राँची से आए गोष्ठी के अति विशिष्ट अतिथि युगांतर भारती के अध्यक्ष, अंशुल शरण ने कहा की पर्यावरण हमारे जीवन का मुख्य आधार है। बढ़ता प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन, वनों की कटाई और प्रकृति संसाधनों का अंधाधुंध दोहन पर्यावरण को गंभीर नुकसान पंहुचा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों, अनियंत्रित खनन, अंधाधुंध कंक्रीट निर्माण और घटते सघन वनों के कारण पूरा प्रदेश थर्मल ट्रैप का शिकार हो गया है। पूर्वी भारत के तीन प्रमुख राज्य झारखण्ड, बिहार और पश्चिम बंगाल के अनेकों शहर ऊष्मा द्वीप बन गये हैं।
उन्होंने गोष्ठी में जानकारी देते हुए बताया कि राजमार्गों के विकास के दौरान पेड़ कटने के मामलें में झारखण्ड का देश में 20वां स्थान है। झारखण्ड में बीते पाँच वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए लगभग डेढ़ लाख पेड़ काटे गए हैं। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारें या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है। यह हम सबकी साझा जिम्मेदारी हैं यदि हम जागरूक नहीं हुए तो आनेवाली पीढ़ियां हमें क्षमा नहीं करेंगी। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करंेगे। अधिक से अधिक घनेदार वृक्ष लगाएंगे और उनकी रक्षा करेंगे।
इस गोष्ठी में विषय प्रवेश- दामोदर बचाओ आंदोलन के बोकारो जिला संयोजक, सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा, स्वागत भाषण- जिला सह संयोजक, श्रवण कुमार सिंह, धन्यवाद ज्ञापन- विक्रम महतो तथा मंच संचालन- शंकर प्रसाद स्वर्णकार ने किया।
इस पर्यावरणीय गोष्ठी में प्रवीण सिंह, राजीव कंठ, ललित सिन्हा, किशना देवी, सोनी श्रीवास्तव, अश्विनी दराद, शिवकुमार श्रीवास्तव, समीर गिरी, भाई प्रमोद, विक्रम महतो, ओम प्रकाश, करमचंद गोप, नित्यानंद प्रसाद, रामाधार सिंह यादव, अवधेश राय, एवं भारी संख्या में पर्यावरण प्रेमी उपस्थित थे।
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