बालाघाट में 22 आदिवासी बच्चों की मौत पर विक्रांत भूरिया का सरकार पर हमला, जांच की मांग
आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने दोनों घटनाओं को लेकर सरकार पर लगाया लापरवाही का आरोप
नई दिल्ली में पत्रकार वार्ता के दौरान आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने मध्य प्रदेश के बालाघाट में 22 आदिवासी बच्चों की मौत और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में छात्रावास में सांप के काटने से तीन आदिवासी बच्चियों की मौत को लेकर सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने दोनों मामलों की विशेष जांच के लिए कमेटी गठित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। भूरिया ने बालाघाट में कुपोषण, पोषण आहार की कथित कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी का मुद्दा उठाया। साथ ही उन्होंने सभी आदिवासी छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
नई दिल्ली: आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने मध्य प्रदेश के बालाघाट में कुपोषण और बीमारियों से 22 आदिवासी बच्चों की मौत और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में छात्रावास में सांप के काटने से तीन आदिवासी बच्चियों की मौत के मामले में सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने दोनों मामलों की जांच के लिए विशेष कमेटी गठित करने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और सभी आदिवासी छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की।
भूरिया ने सोमवार को यहां कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि बालाघाट में जिन 22 बच्चों की मौत हुई है, वे बैगा आदिवासी समुदाय से थे। उन्होंने दावा किया कि संबंधित क्षेत्र में पिछले छह महीने से घर पहुंचने वाला पोषण आहार बंद है और सबसे नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करीब 20 किलोमीटर दूर है।
भूरिया ने कहा कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक आदिवासी छात्रावास में सो रही तीन बच्चियों की सांप के काटने से मौत हो गई। छात्रावास में बिस्तरों की व्यवस्था नहीं थी और एक कमरे में 70 से अधिक बच्चियां जमीन पर सोती थीं। उन्होंने कहा कि घटना में छह बच्चियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से तीन की मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के छात्रावासों में पिछले दो वर्षों के दौरान बच्चों की मौत की कई घटनाएं हुई हैं। उन्होंने नासिक में आदिवासी छात्रावासों की स्थिति सुधारने की मांग को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन का भी उल्लेख किया।
भूरिया ने दोनों मामलों की विशेष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी आदिवासी छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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