Pahalgam Terror Attack: कैसे रची गई साजिश और कैसे भारत ने लिया बदला? ऑपरेशन सिंदूर से ऑप महादेव तक पूरी कहानी
93 दिन तक चला ऑपरेशन महादेव
पहलगाम हमले के बाद सबसे पहले भारत ने कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर कदम उठाए। 23 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो हमले के वक्त सऊदी अरब में थे, दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। अगले ही दिन सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया गया। इसी दिन अटारी सीमा बंद कर दी गई, पाकिस्तानियों के सार्क वीजा रद्द किए गए और पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी गई। उसी दिन गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर पहुंचे, उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की गई, एनआईए घटनास्थल पर पहुंची और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकियों के स्केच जारी किए।
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नई दिल्ली: 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर की घाटी में हुआ पहलगाम आतंकी हमला अब एक साल पूरा कर चुका है। पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं ने भारत में मासूम लोगों की जान लेने की साजिश के तहत अपने आतंकियों को पहलगाम भेजा था। इस लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर हुए हमले में 26 लोग मारे गए थे। इस हमले के बाद भारत ने सिर्फ जवाबी बयान नहीं दिया, बल्कि पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की और बाद में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया।.jpg)
कैसे रची गई हमले की साजिश

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हमला केवल अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे पहले से तय रणनीति और लक्ष्य था, ताकि ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को निशाना बनाया जा सके
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की पहली बड़ी जवाबी कार्रवाई
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट भी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, 7 मई की रात से 9 मई तक पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब और गुजरात जैसे भारतीय इलाकों पर मिसाइलों और करीब 300 से 400 ड्रोनों से हमला किया, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। इसके जवाब में भारतीय वायुसेना ने सटीक हमले करते हुए पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय किया और 11 एयरबेस तबाह कर दिए। पाकिस्तान के कुल 13 सैन्य ठिकानों पर भारत ने हमला किया, जिनमें रनवे और जहाजों के बंकर तक शामिल थे।
ऑपरेशन महादेव
इसके बाद भारत ने उन आतंकियों की तलाश पर जोर दिया, जो पहलगाम हमले के बाद फरार हो गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन महादेव शुरू किया। इस अभियान में 93 दिनों तक 250 किलोमीटर तक पीछा किया गया। खुफिया जानकारी, तकनीकी इनपुट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर यह पुष्टि हुई कि हमले में लश्कर-ए-तैयबा के तीन विदेशी आतंकी शामिल थे, जिनकी पहचान सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिबरान भाई के रूप में हुई। ये आतंकी दक्षिण कश्मीर के दुर्गम जंगलों और हापतनार, बुगमार तथा त्राल की पहाड़ियों में छिपे थे। इसके बाद सेना ने पैरा स्पेशल फोर्सेज को मैदान में उतारा।
