Great Nicobar Project: 20 हजार करोड़ का मेगा प्लान, भारत को इंडो-पैसिफिक का लॉजिस्टिक्स किंग बनाने की तैयारी
ग्रेट निकोबार परियोजना को भारत की समुद्री व्यापार क्षमता और सामरिक दृष्टि से बेहद निर्णायक माना जा रहा है। 20,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल आगे चलकर 21 मिलियन टीईयू क्षमता तक विस्तृत हो सकता है।
Great Nicobar Project: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी.के. जोशी ने गुरुवार को ग्रेट निकोबार परियोजना के संदर्भ में एक समाचार एजेंसी से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना भारत के समुद्री कारोबार की दशा और दिशा दोनों बदल देगी तथा अंडमान-निकोबार को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के एक शीर्ष लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में पहचान दिलाएगी। जोशी के अनुसार यह परियोजना अब अपने प्रारंभिक चरण में कदम रखने जा रही है और इसका केंद्रीय घटक इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) राष्ट्र के समुद्री व्यापार को नई ऊंचाई देगा।
'तीन साल में पूरा होगा पहला चरण'
उपराज्यपाल जोशी के शब्दों में, पहले चरण में यह टर्मिनल करीब 6 मिलियन टीईयू कार्गो की आवाजाही संभालने में सक्षम होगा और इस पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये व्यय होंगे। निर्माण शुरू होने के तीन वर्ष के भीतर इसे चालू करने का इरादा है। परियोजना के अंतिम स्वरूप में क्षमता 21 मिलियन टीईयू तक पहुंच सकती है, जो इसे भारत ही नहीं बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक के सबसे विशाल कंटेनर बंदरगाहों की श्रेणी में ला खड़ा करेगी। गौरतलब है कि टीईयू कंटेनर पोतों और बंदरगाहों की माल परिवहन क्षमता आंकने की अंतरराष्ट्रीय मानक इकाई है।
पीपीपी मॉडल के तहत आकार ले रहा प्रोजेक्ट

हवाई अड्डे और सैन्य ढांचे को भी मिलेगा नया आयाम

'विकसित भारत' के सपने को मिलेगी नई रफ्तार
जोशी ने कहा कि ये सभी प्रयास भारत के 'विकसित भारत' के सामूहिक संकल्प को साकार करने में सहायक होंगे और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की आर्थिक व सामरिक अहमियत को और पुख्ता बनाएंगे। उन्होंने द्वीपों पर चल रही अन्य गतिविधियों का भी उल्लेख किया, जिनमें कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए की गई साझेदारी शामिल है, जिसका मकसद जहाज मरम्मत की क्षमता बढ़ाना है।
'जहाज मरम्मत और निर्माण का गढ़ बनेगा यह इलाका'
जोशी ने बताया कि स्वराज द्वीप के पास पोर्ट मीडोज में प्रस्तावित शिप-टू-शिप ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल और डिगलीपुर के समीप अटलांटा बे में प्रस्तावित गहरे जल के बहुउद्देशीय बंदरगाह जैसे प्रकल्प ग्रेट निकोबार परियोजना की नींव को और सुदृढ़ करेंगे। उनके अनुसार इन निर्माण कार्यों के बाद आने वाले पांच वर्षों में अंडमान सागर में नौवहन गतिविधियों में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है और यह क्षेत्र पहले जहाज मरम्मत और फिर जहाज निर्माण के एक सक्रिय केंद्र के रूप में उभर सकता है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि विविध परियोजनाओं पर अध्ययन कार्य जारी है और आने वाले समय में इन्हें क्रमबद्ध रूप से अमल में लाया जाएगा।
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