ज्यादा सोना भी सेहत के लिए खतरनाक! जानिए ओवरस्लीपिंग के नुकसान
समृद्ध डेस्क: कई लोग रात भर 9-10 घंटे सोने के बाद भी दिन में सुस्ती और थकान महसूस करते रहते हैं। यह ओवरस्लीपिंग की समस्या है, जो वयस्कों के लिए 9 घंटे से ज्यादा नींद लेना मानी जाती है, जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक आदर्श नींद 7-9 घंटे होती है । ज्यादा सोना न सिर्फ शरीर को कमजोर करता है, बल्कि दिमागी स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाता है।

ओवरस्लीपिंग से मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है, जिसकी वजह से वजन तेजी से बढ़ता है और मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर जैसी परेशानियां हो जाती हैं। हार्वर्ड हेल्थ की स्टडीज बताती हैं कि ऐसे लोग डिप्रेशन, चिंता और याददाश्त की कमजोरी का शिकार आसानी से हो जाते हैं । ऊर्जा की कमी, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें भी आम हो जाती हैं, जो रोजमर्रा के कामों को मुश्किल बना देती हैं।

ओवरस्लीपिंग के साफ संकेत जो नजरअंदाज न करें
स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, अगर रात में 9 घंटे से ज्यादा सोना पड़ रहा हो या दिन में बार-बार नींद आ रही हो, तो यह चेतावनी का इशारा है। भूख न लगना, फोकस न कर पाना और लगातार सिरदर्द भी इसके लक्षण हैं । कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत होता है, जैसे स्लीप एपनिया जहां सांस रुक-रुक कर आती है। जॉन हॉपकिंस मेडिसिन के विशेषज्ञों का कहना है कि रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम या दांत पीसने की आदत (ब्रक्सिज्म) भी नींद खराब कर देती है।
क्रॉनिक दर्द या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स से भी सुबह उठते ही थकान छाई रहती है। ऐसे में नींद की क्वालिटी खराब होने से शरीर रिचार्ज नहीं हो पाता। अगर ये लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से जांच जरूरी है।
हर उम्र के लिए सही नींद का फॉर्मूला
नींद की जरूरत उम्र के साथ बदलती रहती है। जॉन हॉपकिंस मेडिसिन की गाइडलाइंस के हिसाब से नवजात शिशुओं को 14-17 घंटे, जबकि वयस्कों को 7-9 घंटे की जरूरत होती है । किशोरों के लिए 8-10 घंटे पर्याप्त हैं। नीचे दी गई टेबल उम्र के हिसाब से साफ तस्वीर देती है:
| उम्र समूह | जरूरी नींद (घंटे में) |
|---|---|
| नवजात (0-3 महीने) | 14-17 |
| शिशु (4-11 महीने) | 12-15 |
| छोटे बच्चे (1-2 साल) | 11-14 |
| प्रीस्कूल (3-5 साल) | 10-13 |
| स्कूली बच्चे (6-13 साल) | 9-11 |
| किशोर (14-17 साल) | 8-10 |
| वयस्क (18-64 साल) | 7-9 |
इस टेबल को फॉलो करें तो स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
ओवरस्लीपिंग से दूर रहने के प्रैक्टिकल टिप्स
स्लीप फाउंडेशन सलाह देता है कि रोज एक ही समय सोने-उठने की आदत डालें। बेडरूम को अंधेरा, शांत और ठंडा रखें, ताकि नींद अच्छी आए । दिन भर ऐक्टिव रहें, लेकिन दोपहर या शाम को कैफीन और अल्कोहल से परहेज करें। बेडटाइम रूटीन बनाएं, जैसे किताब पढ़ना या हल्की स्ट्रेचिंग। अगर समस्या बनी रहे, तो आदतें बदलने के साथ डॉक्टर की सलाह लें। स्वस्थ नींद से न सिर्फ एनर्जी बनी रहती है, बल्कि दिमाग तेज और शरीर फिट रहता है।
समृद्ध डेस्क (Samridh Desk), समृद्ध झारखंड का आधिकारिक संपादकीय विभाग है — जो निष्पक्ष, पारदर्शी और सामाजिक जागरूक पत्रकारिता के लिए समर्पित है। हम अनुभवी संपादकों, रिपोर्टरों, डिजिटल संवाददाताओं और कंटेंट राइटर्स की टीम हैं, जो सत्य और जिम्मेदारी की भावना से समाज के मुद्दों को सामने लाने का कार्य करती है।
समृद्ध डेस्क के नाम से प्रकाशित हर लेख हमारी निष्ठा, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है।
हम हर खबर को तथ्यों, निष्पक्षता और जनहित के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं — ताकि पाठकों को केवल सूचना नहीं, बल्कि सच्चाई का पूरा चित्र मिले।
