झारखंड में सिर्फ साहिबगंज से होकर बहती है गंगा, फिर भी नहीं है NDRF की टीम
हर साल दर्जनों मौतें, संसाधन विहीन गोताखोर
झारखंड का इकलौता गंगा तटीय जिला साहिबगंज आज भी NDRF की स्थायी यूनिट से वंचित है। करीब 40 किलोमीटर तक गंगा बहने के बावजूद हर साल 25 से 35 लोगों की डूबने से मौत हो जाती है।
संजय कुमार धीरज
साहिबगंज: झारखंड का साहिबगंज इकलौता जिला है जिसकी धरती को गंगा नदी छूती है। करीब 40 किलोमीटर तक गंगा जिले की सीमा में बहती है। इसके बावजूद जिले में आज तक NDRF की एक भी स्थायी यूनिट गठित नहीं हो पाई है। नतीजा, हर साल गर्मी और मानसून में नहाने, नाव पलटने या मूर्ति विसर्जन के दौरान दर्जनों लोग गंगा में डूबकर जान गंवा देते हैं।
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आंकड़े डराने वाले, पर इंतजाम नाकाफी
जिला आपदा प्रबंधन के अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार साहिबगंज में हर साल औसतन 25 से 35 लोग गंगा में डूबने से मरते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या 10 से 18 साल के बच्चों की है। साहिबगंज, राजमहल, उधवा प्रखंड के दर्जनों घाटों पर रोज सैकड़ों लोग नहाने आते हैं। सावन, कार्तिक पूर्णिमा और छठ पर यह संख्या हजारों में पहुंच जाती है। इसके बावजूद किसी भी घाट पर स्थायी गोताखोर, चेतावनी बोर्ड या लाइफगार्ड की व्यवस्था नहीं है।
लोगों में आक्रोश, जनप्रतिनिधि भी उठा चुके हैं मांग
हिंदू धर्म रक्षा मंच के प्रदेश महासचिव बजरंगी महतो ने कहा कि जब गंगा हमारे जिले की पहचान है तो आपदा से निपटने की तैयारी सबसे पहले यहां होनी चाहिए। NDRF की एक बटालियन देवघर में है। वहां से साहिबगंज 150 किलोमीटर से ज्यादा दूर है। स्थानीय लोगों ने कई बार विधायक और सांसद से NDRF यूनिट की मांग की है। नगर परिषद की बैठकों में भी प्रस्ताव पास हो चुके हैं। लेकिन फाइलें अब तक टेबल से आगे नहीं बढ़ीं।
प्रशासन का पक्ष
सदर अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू का कहना है कि जिला प्रशासन ने राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को NDRF की स्थायी पोस्ट और गोताखोरों के लिए उपकरण की मांग भेजी है। फिलहाल हर घाट पर खतरे के निशान और चेतावनी बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है। संसाधन मिलते ही स्थानीय गोताखोरों को ट्रेनिंग और किट दी जाएगी।
फिलहाल साहिबगंज के लोगों को हर हादसे के बाद घंटों इंतजार करना पड़ता है। गंगा किनारे बसे इस जिले में एक अदद NDRF यूनिट की मांग अब जनांदोलन का रूप ले रही है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


