स्वास्थ्य विभाग में घोटाले और एंबुलेंस खरीद में भारी अनियमितता, CBI जांच की मांग: बाबूलाल मरांडी
नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग में व्यापक भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त कथित घोटाले, दवा बर्बादी, एंबुलेंस खरीद अनियमितता और नियम विरुद्ध सेवा विस्तार को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि JMHIDPCL को लूट और टेंडर मैनेजमेंट का अड्डा बना दिया गया है।
रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त घोटाला, दवा बर्बादी और एंबुलेंस खरीद घोटाले को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस मामले में हेमंत सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग में जो कॉरपोरेशन बनाया गया है, वह केवल लूट को अंजाम देने और टेंडर-ठेका मैनेज करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।
मरांडी ने कहा कि हेमंत सरकार ने 6 वर्षों में झारखंड की स्थिति पूरी तरह बिगाड़ कर रख दी है। कानून व्यवस्था ध्वस्त है और विकास कार्य ठप हैं। उन्होंने राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार को इसका प्रमुख कारण बताया।

मरांडी ने कहा कि ट्रेजरी घोटाले की जांच का परिणाम क्या निकलेगा, यह अब तक की जांच से समझ में आ चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई हुई? जब तक दोषी अधिकारी पद पर बने रहेंगे, तब तक भ्रष्टाचार खत्म कैसे होगा?
उन्होंने कहा कि ताजा मामला स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और लूट से जुड़ा हुआ है। JMHIDPCL (झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड) में जिस शैलेन्द्र श्रीवास्तव को कंसलटेंट बनाया गया है, उसमें नियम-कायदों की पूरी धज्जियां उड़ाई गई हैं।
उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने 2016 में नियम बनाया था कि किसी सेवानिवृत्त अधिकारी को 3 वर्षों तक ही सेवा विस्तार दिया जा सकता है। बाद में 2022 में नियम बनाया गया कि तीन वर्षों के बाद सेवा विस्तार के लिए मुख्यमंत्री की सहमति आवश्यक होगी।
इसके बावजूद बिना मुख्यमंत्री की स्वीकृति के ही 12 दिसंबर 2025 को शैलेन्द्र श्रीवास्तव नामक व्यक्ति को चौथे वर्ष के लिए कंसलटेंट के रूप में नियुक्त कर दिया गया। उक्त व्यक्ति आज पांचवें वर्ष में भी उसी पद पर कार्यरत हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से JMHIDPCL को लूट, कमीशनखोरी और टेंडर डकैती का अड्डा बना दिया गया है।
मरांडी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के ऑडिट में जो अनियमितताएं पकड़ में आई हैं, वे काफी सनसनीखेज हैं। जून 2022 में 55.58 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 206 एंबुलेंसों का कोई उपयोगिता मूल्यांकन नहीं किया गया। सभी 206 एंबुलेंस एक वर्ष से अधिक समय तक नामकुम में निष्क्रिय अवस्था में पड़ी रहीं। इसका कोई लाभ जनता को नहीं मिला और उक्त एंबुलेंस रखे-रखे सड़ गए।
उन्होंने कहा कि अब फिर से वर्ष 2026 में 237 नई कस्टमाइज्ड एंबुलेंसों की खरीद हेतु लगभग 80 करोड़ रुपये की नई निविदा जारी की गई है। कैग रिपोर्ट में राज्य की एंबुलेंस व्यवस्था से संबंधित खरीद, उपयोग, तकनीकी मूल्यांकन एवं संपत्ति प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
वहीं, कॉर्पोरेशन के गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं एक्सपायर पाई गईं। दवाएं खरीदी गईं, लेकिन मरीजों तक नहीं पहुंचीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड काल में ऑक्सीजन टैंक परियोजना में लगभग 24 करोड़ रुपये का खेल सामने आया है। अयोग्य कंपनी को करोड़ों का ठेका दिया गया। चयनित कंपनी MDD Medical Systems India Pvt. Ltd. आवश्यक 10 वर्षों के अनुभव की शर्त पूरी नहीं करती थी। कंपनी के पास मात्र 3 वर्षों का अनुभव था और उसने जरूरी सुरक्षा प्रमाणपत्र एवं नेटवर्क दस्तावेज भी जमा नहीं किए थे। बावजूद इसके, उसे तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर करोड़ों रुपये का ठेका दे दिया गया।
वहीं, बोलीदाता M/s Sanatan Bus Body Building Pvt. Ltd. अनिवार्य 20 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर की शर्त पूरी नहीं करता था। उसका औसत वार्षिक टर्नओवर मात्र 8.38 करोड़ रुपये पाया गया। संबंधित कंपनी के पास एंबुलेंस निर्माण का नहीं, बल्कि केवल बस बॉडी बिल्डिंग का प्रमाणन था।
उन्होंने कहा कि झारखंड में सरकारी पैसे की किस प्रकार डकैती की जा रही है, यह मामला उसका बड़ा उदाहरण है। यही वजह है कि नियम-कायदों को ताक पर रखकर ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति या सेवा विस्तार किया जाता है, जो गड़बड़ी करें और लूट का हिस्सा ऊपर तक पहुंचाएं।
मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार सब कुछ जानकर भी अंजान बनी हुई है। जांच के नाम पर केवल आईवॉश किया जा रहा है। नामकुम में ऑडिट स्थल के पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया, ताकि कोई भी जानकारी बाहर न जा सके।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को आखिर किस बात का डर है? सरकार ऐसा क्या छिपा रही है?
उन्होंने JMHIDPCL का पुनः ऑडिट कराने की मांग की। साथ ही कहा कि कल हुए ऑडिट की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा कैग रिपोर्ट में उजागर अनियमितताओं के आधार पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वित्तीय एवं प्रशासनिक गड़बड़ी सामने आने के बाद इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच CBI से कराई जानी चाहिए।
मरांडी ने कहा कि चर्चा है कि शैलेन्द्र श्रीवास्तव को गैर-कानूनी तरीके से नियुक्त किया गया, क्योंकि वह CMO के एक अधिकारी के करीबी बताए जा रहे हैं। जिस नियुक्ति में मुख्यमंत्री की सहमति अनिवार्य हो, उसे दरकिनार कर इस प्रकार की नियुक्ति किया जाना गंभीर षड्यंत्र और सत्ता के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है।
उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा संबंधित अधिकारी, जिसने इस गड़बड़ी को संरक्षण दिया, उसे तत्काल बर्खास्त किया जाए।
इसके अतिरिक्त, मरांडी ने इस पूरे कथित घोटाले एवं आपराधिक षड्यंत्र में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव की भूमिका की भी निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच CBI से कराने की मांग की, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
मरांडी ने कहा कि हेमंत सरकार गड़बड़ियों पर कोई सुध नहीं ले रही है। जिस दिन झारखंड में भाजपा की सरकार बनेगी, सारी गड़बड़ियों की जांच होगी और कोई दोषी बचेगा नहीं।
उन्होंने कहा कि जिस ED और CBI पर हेमंत सोरेन को अविश्वास था, अब उनका उन एजेंसियों पर विश्वास होना अच्छी बात है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने द्वारा लिखे गए तमाम पत्र, जिनमें राज्य में व्याप्त घोटालों और गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग की गई थी, उन सभी मामलों को CBI को रेफर करने की सलाह दी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इससे मुख्यमंत्री का ही भला होगा।
साथ ही उन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा के चुनाव लड़ने पर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी को भी चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त है।
इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव और प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
