जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की हो सीबीआई जांच: रघुवर दास
सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जांच की वकालत
विपक्षी नेता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए जेपीएससी व जेएसएससी-सीजीएल विवाद की सीबीआई जांच कराने की मांग की। उन्होंने उत्पाद सिपाही दौड़ में मृत 19 अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी वकालत की।
रांची: सात साल से युवाओं के साथ धोखेबाजी कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ओछी राजनीति करना बंद करें। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2014 से जांच कराने की घोषणा की है। मैं मुख्यमंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए छात्रों की मांग दोहराता हूं कि पूरे मामले की सीबीआई जांच करायी जाये।
मेरे कार्यकाल में जितनी परीक्षाएं हुईं उनमें किसी भी परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली की शिकायत कभी भी किसी छात्र द्वारा नहीं किया गया ना ही आंदोलन हुआ। छठी जेपीएससी की परीक्षा में तकनीकी खामियों मसलन हिंदी और अंग्रेजी के नंबर को जोड़े जाने के सैद्धांतिक निर्णय को लेकर विवाद हुआ था। सीट बेचे जाने या बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप कभी भी नहीं लगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को यदि किसी प्रकार की गड़बड़ियों की शिकायत मिली थी तो वे 2019 से सत्ता संभालने के बाद से क्या कर रहे थे? उन्होंने किसी प्रकार की जांच क्यों नहीं करवायी?
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में आंदोलनरत छात्रों की सभी मांग को legitimate यानी वैध माना यदि मांग वैध है, तो छात्रों की मांग के अनुरूप सीबीआइ जांच क्यों नहीं।
मैं राहुल गांधी से ये भी पूछना चाहता हूं कि उत्पाद सिपाही की दौड़ में जिन 19 आदिवासी और मूलवासी अभ्यर्थियों की मौत हुई उनसे मिलने या उन्हें मुआवजा देने की मांग उन्होंने अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से क्यों नहीं की है? क्या झारखंड के आदिवासी और मूलवासी छात्रों के जीवन की कोई कीमत नहीं है?
कांग्रेस नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी रांची क्यों नहीं आ रहे हैं। क्या राहुल गांधी डर से रांची नहीं आ रहे हैं क्योंकि हेमंत सोरेन ने उनसे कहा है कि अगर रांची आए तो चारों कांग्रेसी मंत्री को हटा देंगे और सत्ता से बाहर कर देंगे। सत्ता पक्ष के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री जी ने राहुल गांधी को रांची नहीं आने की सलाह दी है। मैं पक्के तौर पर दावे के साथ यह कह रहा हूं इसलिए चिट्ठी, सोशल मीडिया के माध्यम से लिख पढ़ रहे हैं।
झारखंड में मुद्दा केवल घोटाले की जांच का नहीं है, जांच में घोटाले का है। सीआइडी जांच का उद्देश्य दोषियों को सजा दिलाना नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोगों और नौकरशाहों को बचाना और साक्ष्य मिटाना प्रतीत होता है। टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द किया गया है, मैं इसका स्वागत करता हूं।
लेकिन इसी CID की जांच में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को क्लीन चिट दी गई थी, यानी सीआईडी खुद कटघरे में है। अब जांच कौन करेगा इसलिए छात्रों द्वारा मांग की जा रही है कि जेपीएससी पीटी परीक्षा, जेएसएससी सीजीएल की सभी परीक्षाओं का जांच सीबीआई से हो ताकि दोषियों को दंड मिल सके। JSSC-CGL परीक्षा में किसी को भी नौकरी से हटाने की शक्ति सरकार के पास है, क्योंकि अभी परीक्षमान पीरियड लागू है। लेकिन यह व्यक्तिगत मामलों में लागू होता है।
सफल अभ्यर्थी के चरित्र या कार्य प्रणाली के आधार पर यह निर्णय लिया जा सकता है। लेकिन पूरी नियुक्ति के मामले में यह शर्त लागू नहीं होती है। वहीं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार पूरी नियुक्ति को रद्द न कर मैरिट वाले अभ्यर्थी और दागदार अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना आवश्यक है। इसके लिए व्यापक जांच जरूरी है। जांच के बाद यदि कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है, तब अंतिम विकल्प के रूप में पूरी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। यह अंतिम विकल्प होना चाहिए।
मैं राज्य सरकार से पुनः मांग करता हूं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितता की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश करें और उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ में आपकी व्यवस्था ने जिन 19 आदिवासी और मूलवासी छात्रों की जान ली उनके परिवारों को अविलंब एक-एक करोड़ का मुआवजा देने की घोषणा करें।
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