दिल्ली पब्लिक स्कूल के 37वें स्थापना दिवस पर "कीर्ति ध्वज" सांस्कृतिक समारोह का भव्य आयोजन
नृत्य-नाटिका में इतिहास की अनगिनत वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि
दिल्ली पब्लिक स्कूल राँची के 37वें स्थापना दिवस पर विवेकानंद सभागार में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम "कीर्ति ध्वज" का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन की उपस्थिति में छात्रों ने वाद्य-संगीत और प्रेरक नृत्य-नाटिकाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
रांची: दिल्ली पब्लिक स्कूल ने अपने 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर 17 जुलाई 2026 को विवेकानंद सभागार में आयोजित भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति "कीर्ति ध्वज – बैनर ऑफ़ ग्लोरी : अ सेलिब्रेशन ऑफ प्राइड, पर्पस एंड पावर "के माध्यम से अत्यंत गरिमामय एवं भव्य आयोजन किया। यह समारोह विद्यालय की उत्कृष्टता, संस्कारों और उपलब्धियों से परिपूर्ण गौरवशाली यात्रा को समर्पित रहा। यह अवसर भारतीय परंपरा, कला-संस्कृति और विद्यार्थियों की अद्भुत प्रतिभा का सजीव प्रतिबिंब था।
विद्यालय का विवेकानंद सभागार उत्सव के उल्लास से आलोकित था, जहाँ विद्यार्थी, अभिभावक, पूर्व छात्र, शिक्षकगण तथा अतिथिगण एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक प्रस्तुति के साक्षी बने। प्रत्येक प्रस्तुति में डीपीएस राँची के विद्यार्थियों की अथक मेहनत, सृजनात्मकता, अनुशासन और समर्पण स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा था। संगीत, नृत्य, नाट्य एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सुसज्जित इस रंगारंग कार्यक्रम ने मंच को अनुपम भव्यता प्रदान किया।समारोह की गरिमा उस समय और अधिक बढ़ गई जब अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।


समारोह का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा एक अत्यंत मधुर एवं भावपूर्ण स्वागत-गान से हुआ, जिसमें विविध संगीत शैलियों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया। अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति और अर्थपूर्ण शब्दों के माध्यम से इस गीत ने दिल्ली पब्लिक स्कूल, राँची की 37 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का भावनात्मक चित्रण किया।इस गीत में विद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, नैतिक मूल्यों, नवाचार तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।
साथ ही यह भी दर्शाया गया कि विद्यालय ने वर्षों से आत्मविश्वासी, संवेदनशील, उत्तरदायी एवं वैश्विक दृष्टिकोण से सम्पन्न नागरिकों के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा अपने आदर्शों एवं मूल्यों के कारण क्षेत्र के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया है।इसके उपरांत मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन किया गया।
स्वागत-गान के पश्चात "रूट्स इन रिद्म: लोक सुरों की अनुगूँज" शीर्षक से एक अद्भुत वाद्य-संगीत प्रस्तुति दी गई। यह भारत की समृद्ध एवं विविध लोक-सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक मनमोहक संगीतमय श्रद्धांजलि थी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मधुर लोकधुनों के माध्यम से विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विशेषताओं, लोक-संगीत एवं परंपराओं का अत्यंत सुंदर चित्र प्रस्तुत किया। प्रत्येक प्रस्तुति अपने क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, लय और लोकजीवन का प्रतिनिधित्व करती हुई भारत की "विविधता में एकता" की भावना को सजीव कर रही थी।
इसके उपरांत विद्यालय की प्राचार्या डॉ. जया चौहान ने मंच पर उपस्थित होकर सभी विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया तथा समारोह में उनकी गरिमामयी उपस्थिति और सतत सहयोग के लिए अपनी गहन कृतज्ञता व्यक्त की। सभा को संबोधित करते हुए विद्यालय की प्राचार्या डॉ. जया चौहान ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा सभी सम्मानित अतिथियों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने बहुमूल्य समय में से समय निकालकर विद्यालय के 37वें स्थापना दिवस समारोह की गरिमा बढ़ाई, इसके लिए वह सदा आभारी रहेंगी।
उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणादायी उपस्थिति ने इस अवसर को और अधिक गौरवपूर्ण एवं स्मरणीय बना दिया है। अपने संबोधन में डॉ. चौहान ने विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से संचालित विभिन्न प्रगतिशील एवं नवाचारी पहलों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया।
उन्होंने शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, नवाचार तथा सह-पाठ्यक्रम संबंधी क्षेत्रों में विद्यालय की उल्लेखनीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सफलताएँ विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के सामूहिक समर्पण, परिश्रम और सहयोग का परिणाम हैं। उन्होंने पुनः यह विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली पब्लिक स्कूल, राँची सदैव गुणवत्तापूर्ण एवं मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करने के अपने संकल्प के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा तथा ऐसे आत्मविश्वासी, संवेदनशील, उत्तरदायी एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करता रहेगा, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दे सकें।
इसके पश्चात विद्यार्थियों ने भगवान श्रीगणेश की वंदना पर आधारित एक अत्यंत मनोहारी एवं आध्यात्मिक प्रस्तुति "गणेश वंदना" प्रस्तुत की। विघ्नहर्ता, बुद्धि एवं समृद्धि के अधिष्ठाता भगवान श्रीगणेश का आह्वान करते हुए इस प्रस्तुति ने सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। शास्त्रीय नृत्य की सौम्य मुद्राओं, भावपूर्ण अभिव्यक्तियों तथा उत्कृष्ट समन्वय से सुसज्जित इस प्रस्तुति ने श्रद्धा, सौंदर्य और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
इसके उपरांत मुख्य अतिथि कल्पना मुर्मू सोरेन, झारखंड विधान सभा की सदस्य, ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की भूरि - भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विभिन्न कला विधाओं का अत्यंत सुंदर समन्वय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा विद्यार्थियों की असाधारण प्रतिभा का सजीव परिचायक है। उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल, राँची परिवार को स्थापना के 37 गौरवशाली वर्षों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए विद्यालय की राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जित उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियाँ विद्यालय की उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और निरंतर प्रगति का प्रमाण हैं।
मुख्य अतिथि ने विद्यालय के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, सृजनात्मकता तथा जीवनोपयोगी कौशलों के विकास पर भी समान रूप से बल देता है। उन्होंने कहा कि ऐसी समग्र शिक्षा विद्यार्थियों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों का आत्मविश्वास, धैर्य और सत्यनिष्ठा के साथ सामना करने में सक्षम बनाती है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें बड़े सपने देखने, आजीवन सीखते रहने तथा प्रत्येक कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे संवेदनशील, सामाजिक रूप से उत्तरदायी एवं आदर्श वैश्विक नागरिक बनें, विनम्रता और ईमानदारी को अपने जीवन का आधार बनाएँ तथा राष्ट्र निर्माण और समाज के कल्याण में सक्रिय एवं सार्थक योगदान दें।
मुख्य अतिथि के प्रेरणादायी उद्बोधन के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम का क्रम एक अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणाप्रद नृत्य-नाटिका "अकथित वीरांगनाएँ – इकोज ऑफ साइलेंट पिल्लर्स " के साथ आगे बढ़ा। यह प्रस्तुति भारतीय इतिहास की उन अनगिनत वीरांगनाओं को समर्पित एक भावभीनी श्रद्धांजलि थी, जिनके अदम्य साहस, त्याग, धैर्य और राष्ट्रसेवा के अमूल्य योगदान को इतिहास के पन्नों में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका।
प्रभावशाली नृत्य-रचना, सशक्त अभिनय और ओजपूर्ण कथावाचन के माध्यम से इन महान नारियों के प्रेरक जीवन-प्रसंगों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रस्तुति का प्रारंभ माता उर्मिला के जीवन-चरित्र से हुआ, जिनका मौन त्याग निस्वार्थ प्रेम, समर्पण और धैर्य का अनुपम उदाहरण है। यद्यपि वे अपने पति भगवान लक्ष्मण के साथ वनवास जाने के लिए पूर्णतः तत्पर थीं, किंतु उनके आग्रह पर उन्होंने अयोध्या में रहकर राजपरिवार की सेवा का दायित्व स्वीकार किया तथा चौदह वर्षों तक विरह का असहनीय दुःख अद्वितीय धैर्य और आत्मबल के साथ सहन किया।
उनका यह मौन तप और त्याग भारतीय नारी के आदर्श चरित्र का अमर प्रतीक है। इसके पश्चात प्रस्तुति में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के दूरदर्शी एवं लोककल्याणकारी व्यक्तित्व को सजीव किया गया। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण हेतु देशभर में अनेक मंदिरों, धर्मशालाओं और तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार कराया। साथ ही उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, विधवाओं के सम्मानजनक पुनर्वास तथा सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर समाज को नई दिशा प्रदान की। नृत्य-नाटिका में आगे सावित्रीबाई फुले के प्रेरणादायी जीवन-संघर्ष को प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने भारत में बालिका शिक्षा का सूत्रपात करते हुए प्रथम स्वदेशी कन्या विद्यालय की स्थापना की तथा जाति एवं लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध निर्भीक होकर संघर्ष किया। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए उन्होंने समाज में समानता, न्याय और मानवीय गरिमा की स्थापना के लिए आजीवन कार्य किया। प्रस्तुति के अंतिम चरण में झलकारीबाई की अद्वितीय वीरता का प्रभावशाली चित्रण किया गया। सन् 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के दौरान झाँसी की घेराबंदी के समय उन्होंने स्वयं को रानी लक्ष्मीबाई के रूप में प्रस्तुत कर शत्रु सेना का सामना किया, जिससे रानी लक्ष्मीबाई को सुरक्षित निकलने का अवसर प्राप्त हुआ।
उनका अद्वितीय साहस, राष्ट्रभक्ति और आत्मबलिदान भारतीय इतिहास में वीरता की अमिट मिसाल के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा। यह भावपूर्ण प्रस्तुति एक अत्यंत प्रभावशाली संदेश के साथ संपन्न हुई कि इतिहास केवल उन व्यक्तित्वों से नहीं बनता जिनका व्यापक रूप से उल्लेख किया जाता है, बल्कि उन असंख्य मौन वीरांगनाओं के त्याग, साहस, धैर्य और समर्पण से भी निर्मित होता है, जिनकी प्रेरणा आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करती है।
सांस्कृतिक संध्या का समापन एक अत्यंत भव्य एवं मनोहारी ग्रैंड फिनाले के साथ हुआ, जिसने पूरे सभागार को उत्साह, उल्लास और भाव-विभोर कर देने वाले वातावरण से भर दिया। विद्यार्थियों की सशक्त एवं समन्वित प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम की भव्यता को चरम पर पहुँचा दिया तथा दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट ने कलाकारों के अद्वितीय परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन को भरपूर सराहना प्रदान की। इसके उपरांत विद्यालय के हेड बॉय प्रिंस जैन एवं हेड गर्ल अतुल्या श्रेष्ठ ने अत्यंत गरिमापूर्ण शब्दों में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, सभी सम्मानित अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षाविदों, मीडिया प्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, सहयोगी कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने समारोह की सफलता में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि सभी के सहयोग, समर्पण और सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन अविस्मरणीय एवं ऐतिहासिक बन सका।
कार्यक्रम का समापन सभी विशिष्ट अतिथियों, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकगण तथा छात्र-प्रतिनिधियों के साथ ग्रुप फोटोग्राफी के माध्यम से हुआ। यह स्मरणीय क्षण विद्यालय की गौरवशाली परंपरा, सामूहिक उपलब्धियों और उत्कृष्टता की निरंतर यात्रा का जीवंत प्रतीक बन गया।
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