अरगड्डा कोयला खदान हादसे के बाद पीड़ित परिजनों से मिले बाबूलाल मरांडी
पीड़ित परिवार ने की सीसीएल से 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग
रामगढ़ के अरगड्डा में अवैध कोयला खदान हादसे का जायजा लेने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट तंत्र द्वारा की गई सामूहिक हत्या बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच और आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी रामगढ़ के अरगड्डा इलाके में अवैध कोयला खनन हादसे में चार मजदूरों की हुई दर्दनाक मौत मामले का जायजा लेने घटनास्थल पहुंचे। साथ ही उन्होंने मृतक देवा बेदिया, डबलू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष घटवार के पीड़ित परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। परिजनों से विस्तृत जानकारी लेते हुए उन्होंने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चारों मजदूरों की असमय मृत्यु अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक है। जिन चार मजदूरों की मौत हुई है वे लोग काफी गरीब परिवार से आते हैं। इसमें देवा और डबलू आपस में चाचा भतीजा हैं। आशीष घटवार की पत्नी गर्भवती है, जबकि डबलू बेदिया की पत्नी और एक बच्ची है। वहीं देवा बेदिया और किशोर रवानी अविवाहित हैं।


हादसे के बाद जो बातें सामने आ रही हैं, वे तो इंसानियत को भी शर्मसार कर देने वाली हैं। आरोप है कि रेस्क्यू के नाम पर 5 हजार रुपये वसूले गए, गंभीर हालत में लोगों को बेहतर अस्पताल भेजने के बजाय सीधे सदर अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी गई। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं बल्कि गरीबों की मौत पर भी वसूली करने वाली निर्लज्ज व्यवस्था का वीभत्स चेहरा है।
उन्होंने कहा कि वैसे भी रामगढ़ अब कोयला चोरी, अवैध कारोबार और पुलिस संरक्षण के मामलों में धनबाद से पीछे नहीं रहा। पीछे रहे भी कैसे? जब सत्ता के गलियारों में “बोली” लगाकर पोस्टिंग तय होती हो, तो फिर जनता की सुरक्षा नहीं बल्कि “हफ्ता वसूली” ही प्राथमिकता बन जाती है। ऊपर से नीचे तक सेटिंग और हिस्सेदारी का खेल चलता रहे, इसलिए खदानें मौत का कुआँ बनी रहे... शायद यही मॉडल बना दिया गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से कहा है कि यदि सरकार में संवेदनशीलता और जवाबदेही का थोड़ा भी अंश शेष है, तो इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। दोषियों पर सिर्फ़ निलंबन का दिखावटी मलहम नहीं, बल्कि हत्या जैसी धाराओं में कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा, सरकारी नौकरी और न्याय सुनिश्चित किया जाए। वरना जनता यह मानने को मजबूर होगी कि झारखंड में गरीब की जान की कीमत अब सिर्फ़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुआवजे की फाइल तक सीमित रह गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड में सरकार, प्रशासन और अवैध खनन माफियाओं का मजबूत सिंडिकेट बना हुआ है। वर्तमान राज्य सरकार में लूट खसोट चरम पर है। अवैध कारोबार में लगातार जनहानि हो रही है। विडम्बना है कि सरकार के संरक्षण में सब कुछ हो रहा है।
मरांडी ने कहा कि इस इलाके में 100 से अधिक अवैध सुरंगनुमा कूप बनाकर यहां कोयले की लूट हो रही है। और तो और इन कूपों में पंखा सहित अन्य सारी सुविधाएं भी मौजूद हैं। क्या इतनी व्यवस्था एक दिन में खड़ी हो गई ? स्पष्ट है, सारा कुछ मैनेज है।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को पीड़ित परिवार और अन्य ग्रामीणों ने बतलाया कि विस्थापन के कारण उन लोगों की जमीन चली गई है और नौकरी भी नहीं है। रहने के लिए घर तक नहीं है। मजबूरी में जान की कीमत पर कोयला का काम करना पड़ता है। पीड़ित परिवार ने सीसीएल से 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है।
Anjali Sinha covers Jharkhand local news, breaking stories, and trending updates at Samridh Jharkhand. She focuses on ground reports, regional developments, and timely news coverage to keep readers informed with accurate and engaging stories. Passionate about journalism, she brings attention to stories that matter to the community.


