कांग्रेस में थोड़ी भी नैतिकता तो वह झारखंड सरकार से समर्थन ले वापस: रघुवर दास

14वीं JPSC पीटी परीक्षा सहित सभी परीक्षा गड़बड़ियों की CBI जांच कराने की मांग उठाई

कांग्रेस में थोड़ी भी नैतिकता तो वह झारखंड सरकार से समर्थन ले वापस: रघुवर दास
रघुवर दास ने कांग्रेस और झारखंड सरकार पर साधा निशाना।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर NEET मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस में नैतिकता बची है तो वह झारखंड सरकार से अपना समर्थन वापस ले।

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह पूर्व राज्यपाल रघुवर दास ने कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों पर नीट मामले में घड़ियाली आंसू बहाने और देश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आज देश में वंशवाद, जातिवाद, एनजीओ और टुकड़े-टुकड़े गैंग के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस, सपा, झामुमो, राजद, आप और वाम दल जैसी पार्टियां नीट के मामले में आंदोलन का ढोंग कर रही हैं और छाती पीट रही हैं, लेकिन झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी की परीक्षाओं सहित अन्य गड़बड़ियों पर उनकी जुबान पूरी तरह चुप है। झारखंड के छात्र, युवा शक्ति और जनता इन सभी दलों से जानना चाहती है कि झारखंड के मामले में कौन जवाब देगा? झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में अभी जो भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, उस पर राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी क्यों चुप है? वे झारखंड में इन गड़बड़ियों के जिम्मेदारों से इस्तीफा क्यों नहीं मांग रहे हैं? श्री दास ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय, रांची में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

 दास ने कहा कि विपक्षी दलों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्हें झारखंड सरकार द्वारा युवाओं के भविष्य के साथ किए जा रहे खिलवाड़ और अन्याय को भी देखना चाहिए। क्षेत्रीय पार्टियों की पालकी ढोने वाली कांग्रेस और वाम दलों में अगर जरा-सी भी नैतिकता और गंभीरता बची है तथा छात्रों की थोड़ी भी चिंता है, तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने का साहस दिखाएं। तभी माना जाएगा कि छात्रों के प्रति उनकी चिंता सियासी नौटंकी नहीं, बल्कि वास्तविक है।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को झारखंड के युवाओं का दर्द क्यों नहीं दिखता? यहां प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां हो रही हैं। झारखंड के युवाओं से राहुल गांधी माफी मांगें। वे भगवान बिरसा मुंडा की धरती पर आएं, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा की दौड़ में मारे गए 19 छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाएं। यदि ऐसा नहीं करते हैं, तो क्यों न माना जाए कि उन्हें छात्रों की नहीं, केवल राजनीति की चिंता है।

उन्होंने कहा कि 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा के लिए पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की ब्लैकलिस्टेड प्राइवेट एजेंसी (टीडीपीएल) को जेपीएससी द्वारा वन टाइम रजिस्ट्रेशन से लेकर अंतिम रिजल्ट प्रोसेसिंग तक के आठ कार्यों की जिम्मेदारी दी गई। इस एजेंसी को वर्ष 2025 में जेएसएससी द्वारा भी ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद इसे जेपीएससी में कैसे काम मिला? इस मेहरबानी की गहन जांच सीबीआई से होनी चाहिए।

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दास ने कहा कि छात्र हित को देखते हुए जिस प्रकार केंद्र सरकार ने नीट यूजी पेपर लीक मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सीबीआई जांच के आदेश दिए और 13 आरोपितों की तुरंत गिरफ्तारी हुई, उसी तरह झारखंड सरकार को भी, चाहे वह 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा का मामला हो या पूर्व की जितनी भी गड़बड़ियां हों, सभी मामलों की सीबीआई जांच की अनुशंसा अविलंब करनी चाहिए।

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 दास ने कहा कि झारखंड ने एक साथ नौ प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित करने का रिकॉर्ड बनाया है। पेपर लीक और गड़बड़ियों में झारखंड का देश में पहला स्थान है। झारखंड के युवाओं के साथ यह क्रूर मजाक है। झारखंड सरकार की कार्यशैली भी अजीब है। क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा होनी थी, कई छात्रों को परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रवेश-पत्र डाउनलोड करने का लिंक मिला। संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 100 में से 40 से अधिक प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर से पूछे गए थे। झारखंड में जेएसएससी और जेपीएससी की परीक्षाओं के पेपर लीक, परीक्षा में धांधली समेत अनेक अनियमितताओं के कई प्रमाण मीडिया ने सार्वजनिक किए। छात्रों और भाजपा ने आंदोलन भी किया, पर राज्य सरकार कार्रवाई करने की बजाय दोषियों को बचाने में लगी है। पहले भी राज्य सरकार द्वारा बिना तैयारी के आनन-फानन में आयोजित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा की दौड़ में 19 आदिवासी-मूलवासी झारखंडी युवाओं की असमय मौत हुई और सैकड़ों युवा गंभीर रूप से घायल हुए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल ही कैबिनेट में पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानूनों की घोषणा की है। इसमें 10 वर्ष की कड़ी सजा और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द सुनवाई पूरी कर आरोपितों को सख्त सजा देने का भी प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार ने जून 2026 में नीट यूजी की दोबारा परीक्षा आयोजित कर परिणाम को पारदर्शी ढंग से प्रकाशित किया और छात्र अपनी सफलता से खुश हैं। केंद्र सरकार गड़बड़ियों पर कार्रवाई कर रही है और व्यवस्था को दुरुस्त कर रही है। वहीं, झारखंड सरकार पर्दा डालकर दोषियों को ही बचाने में लगी है।

 दास ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विषय का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। केंद्र सरकार देश की सर्वोच्च पंचायत संसद में सार्थक और विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों के प्रति गंभीर है, तो उसे चर्चा और समाधान का मार्ग अपनाना चाहिए, न कि चर्चा से भागना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक कमोबेश हर राज्य की समस्या है। कांग्रेस के शासनकाल में भी कई प्रदेशों में पेपर लीक होता रहा है। छात्रों के हित में सभी दलों को, चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, इस विषय पर सार्थक बहस में हिस्सा लेकर समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी राज्य में ऐसी समस्या न रहे।

 दास ने झारखंड सरकार से उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा की दौड़ में मारे गए छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की।

वहीं, दास ने सभी छात्र-छात्राओं से आग्रह किया कि वे किसी भी राजनीतिक उकसावे में न आएं। उन्हें अपने उज्ज्वल भविष्य, शिक्षा और करियर को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। अपनी बात लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से रखनी चाहिए। देश का भविष्य आपके हाथों में है। आपके ज्ञान, परिश्रम और सकारात्मक सोच से ही देश सुरक्षित, सशक्त और विकसित बनेगा।

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Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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