जदयू नेता धर्मेंद्र तिवारी ने सूर्या हांसदा की संदिग्ध मौत पर उठाए गंभीर सवाल
मानवाधिकार व लोकतंत्र पर खतरा, पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप
जदयू नेता धर्मेंद्र तिवारी ने आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ में मौत को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे लोकतंत्र और आदिवासी अस्मिता पर हमला बताते हुए निष्पक्ष न्यायिक जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को मुआवजा व सुरक्षा की मांग की। जदयू ने चेताया कि न्याय न मिलने पर सड़क से सदन तक आंदोलन होगा।
रांची: जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र तिवारी ने आज एक विस्तृत प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि झारखंड के युवा, तेजस्वी एवं जनप्रिय आदिवासी नेता स्व. सूर्या हांसदा की संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ में हुई निर्मम हत्या से पूरा आदिवासी समाज गहरे शोक और आक्रोश में है। यह घटना केवल एक परिवार या एक समुदाय की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की अंतरात्मा को झकझोरने वाली है। जिस तरह से कानून-व्यवस्था के नाम पर फर्जी मुठभेड़ की आड़ में एक उभरते हुए आदिवासी नेता की हत्या कर दी गई, उसने मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आदिवासी अस्मिता पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया है।
तिवारी ने कहा कि सूर्या हांसदा जैसे निर्भीक और जनसमर्पित युवा नेता हमेशा आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान और न्याय की लड़ाई लड़ते रहे। समाज में युवा, युवतियों के लिए मसीहा, उनके भरण पोषण शिक्षा का भी ध्यान रखते थे। सैकड़ो बच्चे इसमें शामिल थे। ऐसे जन समाजसेवी की आवाज को दबाने के लिए यदि पुलिस तंत्र का दुरुपयोग हुआ है। तो यह राज्य के भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है। स्व. सूर्या हांसदा का परिवार आज गहरे दुख और असुरक्षा की भावना में जी रहा है। पूरे आदिवासी समाज में भय और अन्याय का वातावरण बना हुआ है। यह स्थिति किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक राज्य के लिए उचित नहीं कही जा सकती।
धर्मेंद्र तिवारी ने मुख्यमंत्री से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- सूर्या हांसदा की संदिग्ध मौत की पूरी जांच न्यायिक निगरानी में, निष्पक्ष, उच्चस्तरीय और स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके
- इस घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उन पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए।
- सूर्या हांसदा के परिजनों को न्यायोचित मुआवजा, सरकारी नौकरी एवं सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए ताकि उनका जीवन सम्मानजनक ढंग से चल सके।
- भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार एक ठोस नीति बनाकर आदिवासी समाज के नेतृत्व की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि यह केवल एक कानूनी मसला नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, आदिवासी समाज की गरिमा और लोकतांत्रिक विश्वास से जुड़ा हुआ मामला है। समय रहते संवेदनशीलता और गंभीरता से कदम उठाना ही राज्य और समाज के हित में होगा।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
