रूस ने पेश किया दो सीटों वाला Su-57D स्टील्थ फाइटर जेट, भारत कनेक्शन पर चर्चा
रूस के नए दो सीटों वाले स्टील्थ फाइटर Su-57D ने पहली उड़ान भर ली है। जानें इसकी ताकत, लॉयल विंगमैन तकनीक और भारत कनेक्शन।
Su-57D Fighter Jet: रूस ने कुछ ऐसा बनाया है जो शायद आने वाले दशकों तक हवाई युद्ध की तस्वीर बदल दे। Su-57D - यानी रूस के सबसे खतरनाक स्टील्थ फाइटर का दो सीटों वाला नया रूप। और इस विमान को सबसे पहले उड़ाने वाले पायलट ने जो बातें कही हैं, वो सुनकर दुनिया के कई देशों के रक्षा विशेषज्ञ चौंक गए हैं।
19 मई को हुई पहली उड़ान
सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य परीक्षण पायलट सर्गेई बोगदान ने 19 मई को Su-57D की पहली उड़ान भरी। बोगदान कोई नए पायलट नहीं हैं - साल 2000 से वो सुखोई के चीफ टेस्ट पायलट हैं और इससे पहले Su-57 के कई प्रोटोटाइप और प्रोडक्शन मॉडल उड़ा चुके हैं। तो जब ऐसे अनुभवी शख्स ने इस विमान के बारे में बात की, तो जाहिर है दुनिया ने ध्यान से सुना।
भारत के लिए बना है ये विमान?
दूसरी सीट पर बैठा पायलट - सिर्फ यात्री नहीं, असली दिमाग

सोचिए, जब जमीन से हजारों किलोमीटर दूर से रेडियो पर निर्देश देने पड़ते हैं, सिग्नल जाम होते हैं, संचार टूटता है - तब क्या होता है? ऑपरेशन धीमा पड़ जाता है। लेकिन अगर वही अनुभवी कमांडर खुद आसमान में मौजूद हो, तो वो पल में फैसला ले सकता है। आगे के कॉकपिट में बैठे पायलट की मदद कर सकता है। पूरे दस्ते को गाइड कर सकता है -बिना एक सेकंड गंवाए।
बोगदान ने यही कहा, और यह बात सुनने में जितनी सरल लगती है, युद्ध के मैदान में उतनी ही निर्णायक होती है।
स्टील्थ के साथ लॉयल विंगमैन की ताकत
Su-57 पहले से ही रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ जेट है - यानी दुश्मन के रडार से छुपकर वार करने में माहिर। लेकिन Su-57D इससे भी एक कदम आगे जाएगा। इसे लॉयल विंगमैन तकनीक से लैस किया जाएगा, जिसका मतलब है कि यह विमान मानवरहित ड्रोन को कमांड देते हुए उनके साथ मिलकर एक पूरे हवाई बेड़े की तरह काम करेगा। यह संयोजन इसे आज की दुनिया के सबसे जटिल लड़ाकू विमानों की श्रेणी में खड़ा करता है।
MiG-31 की विरासत, Su-57D का भविष्य
रूस में दो सीटों वाले लड़ाकू विमान की परंपरा नई नहीं है। इससे पहले MiG-31 इंटरसेप्टर को भी दो सीटों के साथ बनाया गया था ताकि पिछली सीट पर कोई वरिष्ठ अधिकारी बैठ सके। लेकिन Su-57D उस पुराने ढांचे को स्टील्थ, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन कमांड क्षमता के साथ बिल्कुल नए स्तर पर ले जाता है।
तो क्या भारत लेगा Su-57D?
अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह यह विमान भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है और जिस तरह भारत-रूस के बीच रक्षा सहयोग का लंबा इतिहास रहा है - संकेत साफ हैं। अगर यह सौदा होता है तो भारतीय वायुसेना को एक ऐसा हथियार मिलेगा जो उत्तर और पश्चिम — दोनों मोर्चों पर दुश्मन की नींद उड़ाने में सक्षम होगा।
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