Climate कहानी: AC की बढ़ती मांग से बिजली संकट का खतरा, रिपोर्ट ने बताया बड़ा समाधान
IECC की रिपोर्ट में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर जोर
भारत में बढ़ती गर्मी और तेजी से बढ़ रहे एयर कंडीशनर उपयोग के बीच नई रिपोर्ट ने बिजली संकट की आशंका जताई है। India Energy and Climate Center (IECC) की रिपोर्ट के अनुसार, अगर अगले दस वर्षों में AC की ऊर्जा दक्षता दोगुनी कर दी जाए, तो भारत बड़े बिजली संकट से बच सकता है।
भारत में मई की रातें अब पहले जैसी नहीं रहीं। रात के ग्यारह बजे भी दीवारें गर्म रहती हैं। पंखा चलता रहता है, मगर हवा में राहत नहीं मिलती। नोएडा की किसी सोसाइटी में इन्वर्टर की बीप सुनाई देती है, लखनऊ के छोटे किराए के कमरे में बच्चा करवट बदलता है और अहमदाबाद में कोई बुज़ुर्ग देर रात तक ठंडी हवा का इंतजार करता रहता है।
ऐसे समय में एयर कंडीशनर अब सिर्फ एक “लक्ज़री” नहीं रहा, बल्कि गर्मी से बचने का सबसे बड़ा सहारा बनता जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आने वाले वर्षों में करोड़ों भारतीय AC खरीदेंगे, तो क्या देश की बिजली व्यवस्था उस दबाव को झेल पाएगी?

तेजी से बढ़ रही AC की मांग
भारत में हर साल लगभग 1 से 1.5 करोड़ नए AC बाजार में जुड़ रहे हैं। अनुमान है कि अगले दशक में यह संख्या 13 से 15 करोड़ तक पहुंच सकती है।
समस्या सिर्फ बढ़ती बिजली खपत की नहीं है। असली दबाव शाम के समय पैदा होता है। जैसे ही सूरज ढलता है, सोलर ऊर्जा कम हो जाती है, लेकिन शहरों की गर्म इमारतें दिनभर की गर्मी छोड़ने लगती हैं। उसी समय लाखों AC एक साथ चालू होते हैं और बिजली ग्रिड पर भारी दबाव बनता है।
रिपोर्ट के प्रमुख लेखक और UC Berkeley के फैकल्टी सदस्य Nikit Abhyankar के अनुसार, वर्तमान में AC भारत की पीक बिजली मांग में 60 से 70 गीगावॉट का योगदान दे रहे हैं। अगर नीतियों में बदलाव नहीं हुआ, तो 2030 तक यह मांग 120 गीगावॉट और 2035 तक 180 गीगावॉट तक पहुंच सकती है।
यह भारत की कुल अनुमानित पीक बिजली मांग का 30 प्रतिशत से अधिक होगा।
100 पावर प्लांट जितनी बचत
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत ज्यादा efficient AC को धीरे-धीरे अनिवार्य बना दे, तो 2035 तक करीब 47 गीगावॉट पीक बिजली मांग कम की जा सकती है। यह लगभग 100 बड़े पावर प्लांट्स के बराबर है।
यानि कई बार नई बिजली पैदा करने से ज्यादा असर बिजली बचाने में होता है।
अभी आना बाकी है असली AC बूम
रिपोर्ट बताती है कि भारत में अभी शहरी AC स्वामित्व केवल 15 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि असली AC बूम अभी शुरू होना बाकी है।
आज लिए गए फैसले तय करेंगे कि आने वाले वर्षों में भारत “कूल” रहेगा या लगातार बिजली कटौती का सामना करेगा।
महंगे नहीं होंगे efficient AC
अक्सर माना जाता है कि ज्यादा efficient AC का मतलब ज्यादा महंगा AC होता है। लेकिन अध्ययन के सह-लेखक Amol Phadke का कहना है कि efficiency कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह नहीं होती।
अगर बड़े स्तर पर उत्पादन और सही सरकारी नीति समर्थन मिले, तो ज्यादा efficient AC सस्ते भी हो सकते हैं।
रिपोर्ट का अनुमान है कि efficient AC अगले दशक में उपभोक्ताओं को ₹90,000 करोड़ से ₹2.4 लाख करोड़ तक की शुद्ध बचत दे सकते हैं। शुरुआती कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन कम बिजली बिल के जरिए 2 से 3 वर्षों में वह लागत वापस निकल सकती है।
Make in India के लिए बड़ा मौका
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बिक रहे 1000 से ज्यादा AC मॉडल पहले ही मौजूदा 5-star मानकों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें कई मॉडल भारतीय कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे हैं।
IECC के शोधकर्ता Jose Dominguez का मानना है कि सही नीति संकेत मिलने पर भारत कम लागत वाले high-efficiency AC का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
Cooling अब जरूरत बन चुकी है
इस पूरी बहस के बीच एक और सच्चाई सामने आती है। भारत में AC अब सिर्फ आराम का प्रतीक नहीं रह गया है। कई जगहों पर यह survival का साधन बनता जा रहा है।
जब रातें ठंडी होना बंद कर दें, तब cooling केवल सुविधा नहीं रहती। वह स्वास्थ्य बन जाती है, अच्छी नींद बन जाती है और काम करने की क्षमता बन जाती है।
यही वजह है कि यह रिपोर्ट सिर्फ मशीनों की कहानी नहीं है। यह उस भविष्य की कहानी है, जहां भारत को तय करना है कि बढ़ती गर्मी के बीच वह कैसे जिएगा — ज्यादा कोयला जलाकर या कम बिजली में ज्यादा राहत देकर।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
