झारखंड के पत्थर कारोबार पर टिकी निगाहें, 500 मीटर नियम पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार

वन भूमि से 500 मीटर दूरी के नियम पर हाईकोर्ट करेगा अंतिम फैसला

झारखंड के पत्थर कारोबार पर टिकी निगाहें, 500 मीटर नियम पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
झारखंड में पत्थर खनन और स्टोन क्रशर उद्योग से जुड़े मामले पर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं सभी की नजरें

झारखंड हाईकोर्ट आज पत्थर खनन और स्टोन क्रशर उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण मामले पर फैसला सुनाएगा। वन भूमि से 500 मीटर दूरी के नियम पर होने वाले इस निर्णय का असर सैकड़ों खदानों, क्रशरों और हजारों मजदूरों के रोजगार पर पड़ सकता है।

रांची/साहिबगंज: झारखंड में पत्थर खनन और क्रशर उद्योग की किस्मत का फैसला गुरुवार दोपहर 2:15 बजे होगा। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ 16 अप्रैल को दिए अंतरिम आदेश पर अंतिम सुनवाई करेगी।

क्या है अंतरिम आदेश  

हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में साफ किया था कि वन भूमि की सीमा से पत्थर खनन के लिए न्यूनतम 500 मीटर और स्टोन क्रशर लगाने के लिए 400 मीटर की दूरी अनिवार्य होगी। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2015 और 2017 में यह दूरी घटाकर 250 मीटर कर दी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। यह नियम राज्य के सभी 24 जिलों पर लागू होगा।

कारोबारियों में हड़कंप, अरबों का निवेश दांव पर  

अंतरिम आदेश के बाद से ही पत्थर-क्रशर उद्योग में हड़कंप मचा है। कारोबारियों का कहना है कि अगर फैसला बरकरार रहता है तो सैकड़ों खनन पट्टे और क्रशर लाइसेंस रद्द हो सकते हैं। इससे अरबों का निवेश डूबने, हजारों मजदूरों के बेरोजगार होने और गिट्टी के दाम बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पड़ेगा।

पर्यावरण प्रेमियों ने बताया ऐतिहासिक फैसला  

दूसरी ओर पर्यावरण प्रेमियों ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी सैयद अरशद नसर ने इसे झारखंडवासियों की ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला वन संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर है। इससे जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण पर दीर्घकालिक नियंत्रण मिलेगा।

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गुरुवार की सुनवाई पर टिकीं सबकी नजरें  

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को 12 जून तक अपना पक्ष रखने की छूट दी थी। मियाद पूरी होने के बाद आज सुनवाई हो रही है। सरकार, खदान व क्रशर कारोबारी से लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं तक की नजरें आज के फैसले पर टिकी हैं। अगर हाईकोर्ट अंतरिम आदेश को बरकरार रखता है तो राज्य के सैकड़ों स्टोन खदान और क्रशर पर ताला लगना तय माना जा रहा है।

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Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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