बीआईटी मेसरा और आईआईटी भुवनेश्वर के बीच अनुसंधान व शैक्षणिक सहयोग के लिए एमओयू
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप एमओयू संपन्न
बीआईटी मेसरा और आईआईटी भुवनेश्वर ने अनुसंधान, नवाचार और छात्र विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए पांच साल के समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मानकों के अनुकूल है।
रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा (बीआईटी मेसरा) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर (आईआईटी भुवनेश्वर) ने अनुसंधान, शैक्षणिक सहयोग, नवाचार तथा संस्थागत क्षमता निर्माण के क्षेत्र में संरचित साझेदारी स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता पाँच वर्षों की सहयोग रूपरेखा प्रदान करता है, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान, छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन, संकाय एवं छात्र विनिमय, शैक्षणिक कार्यक्रम तथा प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार शामिल हैं।
इस एमओयू पर बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना तथा आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक प्रोफेसर श्रीपद करमलकर ने हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर समारोह में बीआईटी मेसरा के अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता (आरआईई) के डीन प्रोफेसर राजू पोद्दार तथा रजिस्ट्रार डॉ. राजेश जैन सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।


आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक प्रोफेसर श्रीपद करमलकर ने कहा, "यह साझेदारी सहयोगात्मक अनुसंधान, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी भुवनेश्वर और बीआईटी मेसरा के साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है। हमारे संस्थानों की सामूहिक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए हम प्रभावशाली अनुसंधान परिणाम विकसित करने, नवीन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम भविष्य के नेतृत्व का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
यह साझेदारी उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध देश के दो अग्रणी संस्थानों को एक मंच पर लाती है। वर्ष 1955 में स्थापित बीआईटी मेसरा ने राष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों, उद्योग जगत के सहयोग तथा विश्वस्तरीय अनुसंधान अवसंरचना के समर्थन से एक सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। वर्ष 2020 से 2026 के बीच संस्थान ने ₹120.73 करोड़ के अनुसंधान अनुदान के साथ 283 प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएँ प्राप्त कीं, 100 से अधिक परामर्श परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया तथा 118 से अधिक पेटेंट प्रकाशित हुए।
संस्थान की सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी, जिसमें 100 से अधिक अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरण उपलब्ध हैं, तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बायोमेडिकल प्रौद्योगिकी और अन्य उभरते क्षेत्रों की उन्नत प्रयोगशालाएँ अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार को निरंतर गति प्रदान कर रही हैं।
वर्ष 2008 में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में स्थापित आईआईटी भुवनेश्वर ने इंजीनियरिंग शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह संस्थान अभियांत्रिकी, बुनियादी विज्ञान, पृथ्वी एवं जलवायु विज्ञान, अवसंरचना, उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा सतत प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में अपने सशक्त अंतर-विषयक अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
यह एमओयू सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डॉक्टरेट छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन, छात्र विनिमय एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ, संकाय विनिमय, संयुक्त परामर्श, सेमिनार, कार्यशालाएँ, सम्मेलन, GIAN पाठ्यक्रम, माइक्रो-क्रेडिट कार्यक्रम तथा संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
यह समझौता राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों के समक्ष संयुक्त रूप से अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत करने, सहयोगात्मक बौद्धिक संपदा सृजन एवं उसके व्यावसायीकरण तथा दोनों संस्थानों में उपलब्ध अनुसंधान विशेषज्ञता एवं सुविधाओं के प्रभावी उपयोग को भी प्रोत्साहित करता है। दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त एमओयू कार्यान्वयन समिति सहयोगात्मक गतिविधियों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी तथा समय-समय पर इसकी समीक्षा करेगी।
बीआईटी मेसरा के छात्रों एवं शोधकर्ताओं के लिए यह साझेदारी संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, आईआईटी भुवनेश्वर की अनुसंधान सुविधाओं तक पहुँच, स्नातकोत्तर एवं डॉक्टरेट शोध का सह-मार्गदर्शन तथा विशेष शैक्षणिक एवं नवाचार कार्यक्रमों में भागीदारी के नए अवसर प्रदान करेगी। इससे अंतर-विषयक अनुसंधान को नई गति मिलने, शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने तथा नवाचार-आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।
यह सहयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो बहु-विषयक शिक्षा, संस्थागत साझेदारी, अनुसंधान उत्कृष्टता और नवाचार पर बल देती है। अपनी पूरक क्षमताओं का लाभ उठाते हुए बीआईटी मेसरा और आईआईटी भुवनेश्वर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, सतत अवसंरचना, ऊर्जा, जलवायु लचीलापन, पर्यावरणीय सततता तथा भारत की वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय प्रगति से जुड़े अन्य उभरते क्षेत्रों में संयुक्त पहल करेंगे।
यह समझौता ज्ञापन राष्ट्रीय महत्व के अग्रणी संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारियाँ विकसित करने की दिशा में बीआईटी मेसरा के निरंतर प्रयासों का एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस सहयोग से शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा, अनुसंधान एवं नवाचार को मजबूती मिलेगी, प्रौद्योगिकी विकास को नई गति मिलेगी तथा दोनों संस्थानों के छात्रों, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों के लिए नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही, यह भारत को वैश्विक ज्ञान एवं नवाचार के अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी सार्थक योगदान देगा।
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