Ranchi News: बीआईटी मेसरा में करियर काउंसलिंग, लिबरल आर्ट्स के छात्रों को मिली नई राह
रोजगार के बदलते रुझानों और इंटर्नशिप के अवसरों पर विमर्श
रांची के बीआईटी मेसरा में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा "लिबरल आर्ट्स में करियर के अवसरों की तलाश" विषय पर एक ऑनलाइन काउंसलिंग सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में उद्योग जगत और शोध क्षेत्र के विशेषज्ञों ने छात्रों को बदलते डिजिटल दौर में एआई अनुवाद, पब्लिक पॉलिसी और स्टार्टअप्स जैसे बहु-विषयक क्षेत्रों में उभरतीं रोजगार संभावनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी दी।
रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी) मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग ने आज “लिबरल आर्ट्स में करियर के अवसरों की तलाश” विषय पर एक ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में उद्योग, शोध और सार्वजनिक क्षेत्र के नजरिए से लिबरल आर्ट्स के छात्रों के लिए उभरते करियर विकल्पों पर चर्चा की गई। साथ ही रोजगार के बदलते रुझानों, उच्च शिक्षा, इंटर्नशिप के अवसरों और बहु-विषयक करियर संभावनाओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम में बीआईटी मेसरा के डीन (पीजी) प्रोफेसर एस.एस. सोलंकी, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर कर्ण तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. मृणाल कुमार पाठक उपस्थित रहे। इनके साथ इनोएआईलैब्स के सीईओ डॉ. प्रदीप चटर्जी, एसीएम रांची के सीईओ कुणाल सिन्हा तथा रांची विश्वविद्यालय के टीआरएल से प्रोफेसर मनोज कच्छप ने विशिष्ट वक्ताओं के रूप में सत्र में भाग लिया।

शोध के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए प्रोफेसर मनोज कच्छप ने संथाली, मुंडारी और हो जैसी स्वदेशी भाषाई परंपराओं को डिजिटल दस्तावेजीकरण, शोध इकोसिस्टम तथा ज्ञान संरक्षण से जुड़े प्रयासों और पहलों से जोड़ा। रांची विश्वविद्यालय के टीआरएल में अपने कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एआई-सहायता प्राप्त अनुवाद, डिजिटल आर्काइविंग और भाषा दस्तावेजीकरण को स्वदेशी ज्ञान और क्षेत्रीय अध्ययन से जुड़े उभरते क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया।
सत्र के दौरान मीडिया एवं संचार, पब्लिक पॉलिसी एवं गवर्नेंस, एचआर एवं टैलेंट मैनेजमेंट, शिक्षा एवं एडटेक, विकास अध्ययन, डिजिटल कंटेंट तथा शोध-आधारित भूमिकाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध करियर अवसरों पर चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न सेक्टर्स में बदलती पेशेवर अपेक्षाओं और भूमिकाओं को भी विस्तार से समझाया गया। यह सत्र विभाग द्वारा छात्रों को पारंपरिक शैक्षणिक सीमाओं से आगे बढ़कर नए करियर अवसरों से परिचित कराने और बाहरी विशेषज्ञों एवं पेशेवरों के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा था।
अंत में, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर कर्ण ने तकनीकी शिक्षा के साथ मानवीय दृष्टिकोण को जोड़ने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह सत्र विभाग की बहु-विषयक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की पहल का हिस्सा है। उन्होंने छात्रों को सत्र में चर्चा किए गए उभरते क्षेत्रों, उच्च शिक्षा के अवसरों और मेंटरशिप कार्यक्रमों का सक्रिय रूप से लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
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