संस्कार भारती रांची महानगर की साधारण सभा में साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम
दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
संस्कार भारती रांची महानगर की साधारण सभा सांस्कृतिक और साहित्यिक माहौल में संपन्न हुई। कार्यक्रम में ध्येय गीत, सरस्वती वंदना, काव्य गोष्ठी और संगीत प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। माँ दिवस की थीम पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने मातृत्व, नारी अस्मिता और पारिवारिक संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
रांची: संस्कार भारती रांची महानगर द्वारा आयोजित साधारण सभा का आयोजन सोमवार को अत्यंत गरिमामय एवं सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अपराह्न 2:30 बजे मुख्य अतिथि विजय भूषण द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। आगंतुक सदस्यों का स्वागत मंगल तिलक एवं अंगवस्त्र अर्पित कर किया गया। स्वागत भाषण रांची महानगर के उपाध्यक्ष आशुतोष प्रसाद ने प्रस्तुत किया।
सभा में सुजाता मजूमदार एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत ध्येय गीत ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। वहीं सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। इसके बाद मुख्य अतिथि विजय भूषण को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “माँ दिवस” की संवेदनशील थीम पर आधारित काव्य गोष्ठी रही। कवियों ने मातृत्व, नारी अस्मिता और पारिवारिक संवेदनाओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रभावशाली अभिव्यक्ति दी।
डॉ. सुरिंदर कौर नीलम ने अपनी मार्मिक पंक्तियों —
“सूरज से भी पहले उठकर, धूप की सांकल खोले माँ,
रिश्ते तो अब सौदेबाजी, ममता कभी न तोले माँ”
— प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
अरुणाभूषण ने “माँ तेरे सपने सच हो जाए” की कामना व्यक्त की, जबकि ऋतुराज वर्षा ने माँ की पीड़ा और ममता को संवेदनशील शब्दों में उकेरा। रेनू बाला धार ने नारी आरक्षण के मुद्दे पर अपनी कविता के माध्यम से तीखा स्वर उठाया।
ग्रामीण जीवन की स्मृतियों को स्वर देते हुए रेणु झा ‘रेणुका’ ने भोजपुरी में कविता पाठ किया। वहीं जवाहरलाल ने माँ को रिश्तों की संपूर्णता बताते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी। अमरेश कुमार और राकेश रमन की कविताओं ने भी श्रोताओं को भावुक कर दिया।
उपाध्यक्ष आशुतोष प्रसाद ने कहा, “माँ केवल एक शब्द नहीं, जीवन का सम्मान है। धरती पर ईश्वर का सबसे सुंदर रूप माँ है।”
संगीत प्रस्तुति में डॉ. सुजाता मजूमदार ने माँ के विविध रूपों पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। अवनींद्र सिंह ने कविवर निराला की प्रसिद्ध रचना “वीणा वादिनी वर दे” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। वहीं जे.पी. सिंह ने भी अपने गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में महामंत्री शशिकला पौराणिक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर गुर कमल सिंह जगदेव, अमरेश कुमार, जयप्रकाश सिंह, राकेश रमन, जेपी श्रीवास्तव, लल्लन राय, कुमकुम गौड़, रीना सहाय, विजय खोवाला, अंजलि जैन, दीपमाला, डॉ. सुरिंदर कौर नीलम, जवाहरलाल, अवनींद्र सिंह, शिवपूजन पाठक, अनूप कुमार, सुजाता मजूमदार, ऋतुराज वर्षा, रेनू झा ‘रेणुका’ और रेनू बाला धार सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक वंदे मातरम् गायन के साथ हुआ।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
