राज्यसभा चुनाव में हार के सदमे से नहीं उबर पाई कांग्रेस, आदित्य साहू का पलटवार
भ्रष्टाचार बढ़ाने और विकास अवरुद्ध करने का लगाया विधिक आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अपने विधायकों को एकजुट न रख पाने वाली कांग्रेस अपनी नाकामी छुपाने के लिए भाजपा पर अनर्गल आरोप लगा रही है। उन्होंने कांग्रेस शासन को भ्रष्टाचार, ध्वस्त कानून-व्यवस्था और केवल सत्ता सुख भोगने का केंद्र करार दिया।
रांची: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस द्वारा राज्यसभा चुनाव परिणाम को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा पर लगाए आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि राज्यसभा चुनाव में अपनी करारी हार के सदमे से कांग्रेस पार्टी अभी तक उबर नहीं पाई है। इसी कारण कांग्रेस खुद अपना आत्ममंथन छोड़ भाजपा के खिलाफ उलूल जुलूल बयानबाजी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अब इस जन्म में कांग्रेस हार के सदमे से उबरने वाली भी नहीं है। राज्यसभा चुनाव से उनकी हार का सिलसिला शुरू हो गया है, 2029 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव अभी बाकी ही है।
साहू ने कहा कि इतनी किरकिरी के बाद भी कांग्रेस द्वारा सरकार में बने रहने वाला बयान कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता है। चाहे कितनी भी दुर्गति हो जाय, सत्ता से चिपके रहना कांग्रेस का तो स्वभाव ही है। अब इतनी दुर्गति के बावजूद भी कांग्रेस संतुष्ट है तो उनका भगवान ही मालिक है। कांग्रेस कहती है कि वे कोई भी विष पीने को तैयार हैं। वास्तविकता तो यह है कि कांग्रेस सरकार से चिपककर मलाई खाने का काम कर रही है। जबकि कांग्रेस जैसे निकम्मे दल के हाथों में शासन होने के कारण असली विष तो जनता को पीना पड़ रहा है।


साहू ने कहा कि कांग्रेस ध्येय और उद्देश्य की बड़ी बड़ी बातें कर रही है। सत्ता से चिपके रहने का इनका मुख्य उद्देश्य क्या है, जनता इसे अच्छी तरह जानती है। लूट खसोट, भ्रष्टाचार को बढ़ाना, विकास अवरुद्ध करना ही तो इनका मुख्य उद्देश्य है। राज्य में लाॅ एंड ऑर्डर ध्वस्त रहे, राजधानी में नाक के नीचे से सैकड़ों बच्चों का अपहरण हो, बीते 6 वर्ष में 10000 से बच्चियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म हो जाए, अंचल/ब्लॉक में जनता की गाढ़ी कमाई लुटवाना ही इनका मुख्य ध्येय है। कांग्रेस की चिकनी चुपड़ी बातों को जनता बखूबी समझ रही है और ये अपनी करनी से उपहास का पात्र बन चुके हैं।
आदित्य साहू ने कहा कि हमने पूर्व में भी कहा कि पार्टी की इच्छा थी कि कोई कार्यकर्ता ही राज्यसभा जाए। लेकिन बीजेपी के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं थी। बीजेपी चाहती तो जोड़ तोड़ की राजनीति से किसी कार्यकर्ता को राज्यसभा चुनाव भेज सकती थी। निर्दलीय के रूप में परिमल नाथवानी पार्टी समर्थन मांगने आए तो पार्टी ने उनका समर्थन किया।
परिमल नाथवानी के लिए सभी 81 विधायक उनके वोटर थे। अब जब कांग्रेस के साथ रहने वाले विधायक उनकी नीतियों से सहमत नहीं हैं तो कांग्रेस को किसी पर दोषारोपण करने की बजाय आत्ममंथन करनी चाहिए। वे अपने विधायकों को लामबंद नहीं रख पाए तो इसमें बीच में भाजपा कहां से मिल गई। विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर राष्ट्रहित में मतदान किया है।
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