Pakur News: आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है आदिम जनजाति बहुल छूरीधारी गांव
दूषित पानी पीने से लगातार बना रहता है बीमारी का खतरा
पाकुड़िया प्रखंड की कर्माटांड़ पंचायत का आदिम जनजाति बहुल छूरीधारी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। करीब 300 की आबादी वाले इस गांव में पक्की सड़क न होने से मरीजों को खाट पर अस्पताल ले जाना पड़ता है और लोग झरना कूप का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
पाकुड़िया: आजादी के 75 वर्ष बाद भी प्रखंड क्षेत्र की कर्माटांड़ पंचायत अंतर्गत आदिम जनजाति बहुल छूरीधारी गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव के लगभग 300 ग्रामीण आज भी सड़क और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पक्की सड़क नहीं होने के कारण आवागमन के लिए केवल पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है तथा गांव का संपर्क बाहरी क्षेत्रों से कटने की आशंका बनी रहती है। पेयजल की समस्या भी गांव की बड़ी परेशानी है। ग्रामीणों के अनुसार पूरे गांव के लोग झरना कूप के गंदे पानी पर निर्भर हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की मांग प्रशासन से की है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव तक जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए तथा शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि छूरीधारी गांव के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
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