Palamu News: पिकेट बनाने के खिलाफ फूटा जनाक्रोश: मेदिनीनगर में बाजार पूरी तरह बंद, व्यापारियों में भारी उबाल
पूर्व जिप सदस्य के नेतृत्व में ग्रामीणों की बैठक, शुक्रवार को डीसी-एसपी को सौंपेंगे ज्ञापन
पलामू जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत किशुनपुर आउटपोस्ट (ओपी) को डाउनग्रेड कर दोबारा पुलिस पिकेट बनाए जाने के प्रशासनिक निर्णय के खिलाफ रविवार को स्थानीय व्यवसायियों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। इसके विरोध में किशुनपुर बाजार की सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। पूर्व जिला परिषद सदस्य के नेतृत्व में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि शुक्रवार को वरीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा और मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन होगा। इस बीच भाजपा नेता नंदकुमार राम की पहल पर पलामू रेंज के डीआईजी किशोर कौशल ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है।
मेदिनीनगर: जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत किशुनपुर आउटपोस्ट (ओपी) को दोबारा पुलिस पिकेट में तब्दील किए जाने के विरोध में रविवार को स्थानीय व्यवसायियों और आम नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। इस निर्णय के विरोध में किशुनपुर बाजार की सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां ठप हो गईं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने इस फैसले को क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए एक बड़ा झटका बताते हुए चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
बैठक में निंदा, शुक्रवार को वरीय अधिकारियों को सौंपा जाएगा ज्ञापन
रविवार को किशुनपुर देवी मंडप के समीप पूर्व जिला परिषद सदस्य के नेतृत्व में व्यवसायियों और ग्रामीणों की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक में ओपी को पिकेट बनाने के प्रशासनिक निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की गई। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आने वाले शुक्रवार को जिले के वरीय अधिकारियों को इस संबंध में एक लिखित ज्ञापन सौंपा जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में चक्का जाम समेत उग्र आंदोलन किया जाएगा।
उग्रवाद के काले दौर को याद कर सहमे लोग
सांसद वीडी राम ने लिया था गोद:

क्या बोले व्यवसायी?
"अचानक ओपी के स्थान पर पिकेट का बोर्ड टांग दिए जाने से पूरे क्षेत्र में फिर से डर का माहौल बन गया है। शादियों और लगन के इस सीजन में दुकानदार देर रात तक बेखौफ होकर दुकानें चलाते थे, लेकिन अब सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता सताने लगी है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई जो सुरक्षित हो चुके क्षेत्र को वापस पिकेट में बदलना पड़ा?"
पुरानी घटनाओं के जख्म हुए हरे
ग्रामीणों ने अतीत की खौफनाक घटनाओं को याद करते हुए बताया कि पिकेट स्थापना से पहले उग्रवादियों ने यहाँ एक निजी चिकित्सक की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इसके अलावा पुलिस और उग्रवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ भी हो चुकी थी। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना किसी भी लिहाज से सही नहीं है।
डीआईजी किशोर कौशल ने दिया जांच का भरोसा
इस गंभीर मामले को लेकर भाजपा नेता नंदकुमार राम ने पलामू रेंज के डीआईजी (DIG) किशोर कौशल से मुलाकात की और उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराया। मामले पर संज्ञान लेते हुए डीआईजी ने कहा कि मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से यह विषय उनके ध्यान में आया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस बात की पूरी जांच कराई जाएगी कि आखिर किस अधिकारी के निर्देश पर और किन परिस्थितियों में ओपी को पिकेट में बदला गया है। नंदकुमार राम ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इस मनमाने फैसले को जल्द वापस नहीं लिया गया, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
बैठक में ये रहे मुख्य रूप से उपस्थित
इस विरोध बैठक और बंदी को सफल बनाने में मुख्य रूप से सुखलाल प्रजापति, इकबाल अंसारी, संतोष उपाध्याय, महेंद्र चौधरी, सुभाष साव, विकास उपाध्याय, विनोद सोनी, नवल किशोर तिवारी, श्रीकांत तिवारी, अजय प्रसाद, हिमांशु कश्यप, ओमप्रकाश गुप्ता, राजीव मालाकार, प्रमोद गिरी, संतोष पांडेय, धीरेंद्र नारायण उपाध्याय, विकास रजक, राजू पासवान, कृष्ण उपाध्याय, प्रदीप दुबे, देवेंद्र सोनी, विजय सोनी, बिहारी सोनी, सुशील कश्यप, ददन गुप्ता, सरफुद्दीन अंसारी, मोहम्मद नईम अंसारी सहित भारी संख्या में स्थानीय व्यवसायी और ग्रामीण उपस्थित थे।
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