पांकी जमीन विवाद: विधायक के आरोपों पर दामोदर मिश्रा का पलटवार, बोले- यह राजनीतिक स्टंट
निष्पक्ष और दस्तावेजी जांच कराने की मांग
पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र के महुगाईं गांव में जमीन विवाद और जातिसूचक टिप्पणी के आरोपों को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। आरोपों का सामना कर रहे दामोदर मिश्रा ने विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता के बयानों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक स्टंट और साजिश करार दिया।
पलामू: मेदिनीनगर पांकी थाना क्षेत्र के महुगाईं गांव में जमीन विवाद और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग को लेकर मचे सियासी और कानूनी घमासान में अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ आ गया है। इस पूरे मामले में मुख्य निशाना बनाए गए दामोदर मिश्रा ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए स्थानीय विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता और विरोधी गुट के खिलाफ तीखा पलटवार किया है। दामोदर मिश्रा ने विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए सीधे तौर पर इसे कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने और अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए किया गया 'राजनीतिक स्टंट' करार दिया है।
‘जब आमना-सामना ही नहीं हुआ, तो आरोप कैसे?’ — कानूनी वैधता पर सवाल
दामोदर मिश्रा ने पूरे मामले की कानूनी विसंगतियों को उजागर करते हुए स्पष्ट किया,

विधायक पर लगे गंभीर आरोप:

पहला सवाल: विधायक किस कानूनी अधिकार के तहत किसी मामले की जांच से पहले ही किसी को 'दोषी' या 'नाबालिग पहचानकर्ता' की थ्योरी गढ़कर मीडिया में बयान जारी कर सकते हैं?
दूसरा सवाल: क्या विधायक पुलिस प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर दबाव बनाकर एकतरफा कार्रवाई सुनिश्चित कराना चाहते हैं?
दामोदर मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे स्वयं इस मामले में पीड़ित हैं। उनके खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले लोगों से पहले, उन्होंने खुद अपनी लिखित समस्या और संबंधित जमीन के पुख्ता कानूनी दस्तावेज उपायुक्त (DC) पुलिस अधीक्षक (SP), अंचलाधिकारी (CO) और तमाम उच्च अधिकारियों के समक्ष पेश किए थे।
अधिकारियों को सौंपी गई शिकायत की प्रति
दामोदर मिश्रा ने प्रेस और जनता के सामने उन शिकायतों की प्रतियां भी साझा की हैं, जो उन्होंने विपक्षियों से पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों को दी थीं। उन्होंने कहा, "मैं खुद प्रताड़ित हूं और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा चुका हूं। लेकिन अब उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली तर्ज पर, मुझ पर ही बेबुनियाद आरोप मढ़े जा रहे हैं ताकि मेरी वास्तविक और वैध शिकायतों को दबाया जा सके।"
न्यायालय और निष्पक्ष जांच पर भरोसा
इस पूरे प्रकरण में दामोदर मिश्रा ने साफ कर दिया है कि वे विधायक के किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि राजनीतिक रसूख और विधायक के दखल से दूर हटकर, पूरे मामले की निष्पक्ष और दस्तावेजी जांच (Documentary Verification) कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.


