झारखंड में कुछ मनबढू अधिकारियों का रवैया तानाशाह जैसा: बाबूलाल मरांडी
महिला विधायक के सम्मान का मुद्दा बना बड़ा सवाल
जमुआ विधायक मंजू कुमारी के साथ पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव के कथित अहंकारपूर्ण रवैए पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने विभाग को भ्रष्टाचार से ग्रस्त बताते हुए अधिकारियों के व्यवहार को तानाशाही करार दिया।
गिरिडीह/रांची: जमुआ विधायक के साथ पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव के अहंकारपूर्ण रवैए पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कड़ा एतराज जताया है।
उन्होंने कहा कि पथ निर्माण विभाग भ्रष्टाचार के दागों से सना हुआ है और अब उसके अधिकारी जनप्रतिनिधियों को भी “दरबारी” समझने लगे हैं। साथ ही मुख्यमंत्री से संज्ञान लेने और ऐसे अधिकारियों को उनकी औकात बताने की मांग की है।

मरांडी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि सामने आई तस्वीर केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि सत्ता पोषित घमंड और व्यवस्था की सड़ांध का जीता-जागता प्रमाण है। एक तरफ जनता द्वारा चुनी गई विधायक और दूसरी तरफ विवादों में घिरे अधिकारी, लेकिन व्यवहार ऐसा मानो जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि कोई फरियादी हो। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही लोकतंत्र है और क्या यही जनता के वोट का सम्मान है?
उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री तक आम नागरिक को अपने पास बैठाकर सम्मान देते हैं, तो राज्य के अधिकारी किस घमंड में हैं। जो अधिकारी विधायक की गरिमा नहीं समझता, वह आम जनता के साथ कैसा व्यवहार करेगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
मरांडी ने कहा कि पथ निर्माण विभाग पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा है और अब उसके अधिकारी जनप्रतिनिधियों को भी “दरबारी” समझने लगे हैं। उन्होंने इसे और भी शर्मनाक बताते हुए कहा कि एक महिला विधायक के साथ ऐसा व्यवहार लोकतंत्र का अपमान है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से ऐसे “कमाऊ, बेलगाम और मनबढ़” अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही कहा कि अधिकारियों को यह समझाना जरूरी है कि वे जनता के सेवक हैं, शासक नहीं। यदि कार्रवाई नहीं होती है, तो यह संदेश जाएगा कि राज्य में अधिकारी ही असली सत्ता हैं और जनप्रतिनिधि केवल नाम मात्र के हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए अनुशासन जरूरी है। अहंकार और भ्रष्टाचार का अंत हमेशा बुरा होता है। मुख्यमंत्री से उन्होंने अपील की कि वे तय करें कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का सम्मान बचाना है या घमंडी अधिकारियों को खुली छूट देनी है।
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